ब्राउजर में स्क्रोल करते ब्लॉग टाइटल बगैर HTML कोड में कोई भी बदलाव करे लगाये !

View Image in New Windowमनोज जैसवाल : आज तकनीकी पोस्ट के क्रम में आपको एक नया तरीका बताते हैअब आप अपने ब्लॉग के शीर्षक और सन्देश को ब्राउजर और टैब में स्क्रोल करते हुए दिखा सकते हैं ।
इसका उदाहरण आप इस ब्लॉग में देख सकते हैं ।


अपने ब्लॉग में ये सुविधा जोड़ने के लिए आपको अपने ब्लॉग के HTML कोड में कोई भी  बदलाव नहीं करना  होगा इसलिए ये प्रक्रिया बड़ी ही आसानी  के साथ करें ।


यह बिजेट इस ब्लॉग में लाइव देख सकते है . इस बिजेट को बहुत आसानी से तीन कदमो में अपने ब्लॉग पर लगाया जा सकता है.
इस बिजेट को ब्लॉग पर लाने के लिए नीचे बताई प्रक्रिया देखे Blogger


Layout


 "गैजेट जोड़ें"और फिर "HTML / Javascript" का चयन करें


अब खुले बॉक्स में  नीचे दिया कोड डाले 

<script type='text/javascript'>
//<![CDATA[
msg = "welcome to majedaar dumiya";
msg = " This is manojjaiswalpbt site " + msg;pos = 0;
function scrollMSG() {
document.title = msg.substring(pos, msg.length) + msg.substring(0, pos); pos++;
if (pos > msg.length) pos = 0
window.setTimeout("scrollMSG()",200);
}
scrollMSG();
//]]>
</script>
<script src='http://files.main.bloggerstop.net/uploads/3/0/2/5/3025338/swfobject.js' type='text/javascript'/></script>



अब  विकल्प पर  Save  बटन पर क्लिक कर सुरक्षित करें 
लाल रंग से लिखे सन्देश  की जगह अपना मनपसंद सन्देश लिखना ना भूले 

क्या आपको यह लेख पसंद आया? अगर हां, तो ...इस ब्लॉग के प्रशंसक बनिए !!

पेज नेविगेशन में अगली-पिछली पोस्ट का शीर्षक दिखायें.

ब्लॉगर में जब आप पोस्ट पढ़ते हैं तो अगली पोस्ट पर जाने के लिए अगली पोस्ट और पिछली पोस्ट पर जाने के लिए पिछली पोस्ट पर क्लिक करके जाते हैं यदि ऐसा हो कि अगली और पिछली पोस्ट की जगह पोस्टों का शीर्षक दिखे तो कितना अच्छा रहेगा। इसी उपाय के लिए मैं यह पोस्ट लिख रहा हूँ आशा है कि आपको यह बहुत पसंद आयेगी।







ऐसा करना बहुत ही सरल है।



  1. आप सबसे पहले ब्लॉगर  में जायें
  2. फिर अपने ब्लॉग के टेम्पलेट पर जायें और Edit HTML पर क्लिक करें
  3. फिर आगे बढ़े पर क्लिक करें
  4. अब </head> कोड की खोज CTRL+F के ज़रिए करें
  5. और ठीक उसके ऊपर यह नीचे दिया गया कोड पेस्ट कर दें


                          <b:if cond='data:blog.pageType == &quot;item&quot;'>
<script type='text/javascript'>
//<![CDATA[
$(document).ready(function(){
var newerLink = $("a.blog-pager-newer-link").attr("href");
$("a.blog-pager-newer-link").load(newerLink+" .post-title:first", function() {
var newerLinkTitle = $("a.blog-pager-newer-link").text();
$("a.blog-pager-newer-link").text("← " + newerLinkTitle);
});
var olderLink = $("a.blog-pager-older-link").attr("href");
$("a.blog-pager-older-link").load(olderLink+" .post-title:first", function() {
var olderLinkTitle = $("a.blog-pager-older-link").text();
$("a.blog-pager-older-link").text(olderLinkTitle + " →");//rgt
});
});
//]]>
</script>
</b:if>
6-  अब अपना टेम्पलेट सहेज दें और अपने ब्लॉग की कोई भी पोस्ट खोलकर देखें।

ब्‍लॉगर के कॉपीराइट बिजेट को मूव करने का तरीका !

View Image in New Windowमनोज जैसवाल  : आज तकनीकी पोस्ट के क्रम में आपको एक नया तरीका बताते है.नोट :कोड में परिवर्तन करने से पहले अपनी टेम्पलेट का बैकअप जरूर रखें। इससे आप अपनी मूल टेम्पलेट फिर से पा सकते हैं।
कई बार ब्लॉग को आकर्षक बनाने और इसमें कुछ अच्छे फीचर जोड़ने के लिए इसकी टेम्पलेट के एचटीएमएल कोड के साथ छेड़छाड़ करनी पड़ती है। बदलाव को सेव करने से पहले उसका प्रिव्यू देखा जा सकता है, लेकिन अगर एक बार बदलाव सेव कर दिए जाएं, तो उसे फिर से पहले जैसा करना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। अगर बदलाव करने से पहले अपनी मूल टेम्पलेट को कंप्यूटर में डाउनलोड कर सेव कर लिया जाए तो वह आपके बैकअप के रूप में काम आ सकती है। जैसे ही आप बदलावों से ऊब जाएं, मूल टेम्पलेट को फिर से अपलोड कर लीजिए और आपका सदाबहार ब्लॉग फिर से तैयार.
कॉपीराइट विजेट को रिमूव करना  . How to Remove Attribution Widget / Copyright widget line at the bottom on Blogger यदि आप अपने ब्‍लॉग में ब्‍लॉगर के Template Designer से टैम्‍पलेट चुन कर लगाया है तो आपके ब्‍लॉग के एकदम नीचे Attribution कॉपीराइट बिजेट नजर आता है ऐसा.




इसमें आप अपना नाम डाल सकते हैं किन्‍तु इसे आप हटाना चाहेंगें तो यह विजेट हटता नहीं है क्‍योंकि इसे एडिट करने पर यहां रिमूव का विकल्‍प नहीं होता .
तो लीजिए हम इसे हटाने का तरीका  क्रमिक रूप से बतलाते हैं - अपने ब्‍लॉगर आई डी के साथ लाग इन हो > डैशबोर्ड > डिज़ाइन > एडिट एचटीएमएल यहॉं एडिट  विजेट टैम्‍पलेट के सामने दिये गये छोटे बाँक्स को क्लिक करें.
अब नीचे जो एचटीएमएल कोड नजर आ रहा है उसमें attribution शब्‍द को फाइन्‍ड विकल्‍प  F + कुंजी से खोजें. यहां Attribution widget code कुछ ऐसा दिखेगा.

यहां true के स्‍थान पर false लिखें, अब कोड बाक्‍स के नीचे दिये गए टैम्‍पलेट सेव बटन को क्लिक कर सेव करें. पुन: वापस > पेज इलेमेंट में जाए, अब Attribution कापीराईट विजेट को एडिट करके देखें -
अब यहां रिमूव बटन का विकल्‍प आ गया है, रिमूव को क्लिक करें Attribution कापीराईट विजेट हट जायेगा, यदि आप इसे हटाना नहीं चाहते तो यह विजेट आपके ब्‍लॉग के साईड बार या अन्‍य बार में आपके पसंद की जगह मूव हो जायेगा.

क्या आपको यह लेख पसंद आया? अगर हां, तो ...इस ब्लॉग के प्रशंसक बनिए !!

अपनी प्रत्येक पोस्ट के अंत में अपने हस्ताक्षर लगाये !

View Image in New Windowमनोज जैसवाल : ब्लॉग की प्रत्येक पोस्ट के अंत में अपने हस्ताक्षर लगाये । ब्लॉग पर यह signeture और भी आवश्यक हो जाता है अगर ब्लॉग सामूहिक रूप से संचालित किया जा रहा हो या ब्लॉग के एक से अधिक aurthor हो। आप ब्लॉग के सभी aurthor या स्वामी के लिए एक विशेष signeture का उपयोग कर सकते है जो आपको यहाँ से मिलेंगे। अब इस signeture को अपने ब्लॉग पर ले जाने के लिए नीचे बताई प्रक्रिया अपनाये।
1. सबसे पहले इस वेबसाइट पर जा कर अपने ब्लॉग के लिए signeture बनाये। क्लिक करे My Live Signature
2. signeture बनाकर उसका कोड प्राप्त करे व इसे कॉपी करले
3.अब अपने ब्लॉगर खाते में प्रवेश करे और Layout > Edit HTML पर जाये यहाँ Expand your Widget Templates पर क्लिक करे
4.यहाँ पर नीचे दिया कोड तलाशे
<div class='post-footer-line post-footer-line-1'>
अगर आपकी ब्लॉग टेम्पलेट  में इस तरह का कोई कोड नहीं मिल रहा है तो नीचे दिया कोड तलाशे
<p class='post-footer-line post-footer-line-1'>
या यह कोड तलाशे
<data:post.body/>
a) अगर आपका ब्लॉग एक ही प्रयोक्ता द्वारा चलाया जा रहा है तो नीचे दिए कोड को ऊपर ढूंढे गए कोड के बिलकुल नीचे पेस्ट करदे
<img src='url_of_your_signature_image' style='border:0px;'/>


ध्यान दे इसमें 'url_of_your_signature_image' की जगह अपनी signeture image का पता डालना न भूले
b) अगर आपका ब्लॉग सामूहिक रूप से संचालित है और इसके एक से अधिक aurthor है तो नीचे दिए इस कोड का उपयोग करे

<b:if cond='data:post.author == &quot;Author1Name&quot;'>


<img src='url_of_author1_signature_image' style='border:0px;'/>


</b:if>

<b:if cond='data:post.author == &quot;Author2Name&quot;'>


<img src='url_of_author2_signature_image' style='border:0px;'/>


</b:if>


ध्यान दे इसमें AuthorName की जगह ब्लॉग के दोनों aurthor का नाम और url_of_author1_signature_image की जगह दोनों aurthor के signeture image का पता डालना न भूले।
5.परिवर्तन को सेव करे ।


क्या आपको यह लेख पसंद आया? अगर हां, तो ...इस ब्लॉग के प्रशंसक बनिए !!

पेश है ब्लॉगर के लिए लोकप्रिय विजेट

मनोज जैसवाल : पेश है ब्लॉगर के लिए लोकप्रिय विजेट एनीमेशन उपयोग किया गया है.यह बिजेट इसी ब्लॉग में लाइव देख सकते है.इस बिजेट को बहुत आसानी से तीन कदमो में अपने ब्लॉग पर लगाया जा सकता है.इस बिजेट को ब्लॉग पर लाने के लिए नीचे बताई प्रक्रिया देखे Blogger

Layout

* (यदि आप पहले से ही इस गैजेट का प्रयोग कर रहे है तो  इस कदम को छोड़ दे )
    * के बाद आप लोकप्रिय पोस्ट गैजेट "गैजेट जोड़ें"और फिर "HTML / Javascript" का चयन करें

    

View Image in New Window



अब नीचे दिया कोड खुले बॉक्स में डाले 



 अब परिवर्तन को सेब कर दे


पोस्ट शीर्षक के साथ अपना आइकान भी लगाये

View Image in New Windowमनोज जैसवाल :ब्लॉग पर पोस्ट शीर्षक में ब्लॉग का icon जोड़े। इसे बेहद  आसानी से अपने ब्लॉग पर लगाया   जा सकता है। नीचे दर्शाई गयी ट्रिक्स को अपनी ब्लॉग templete पर सहेजे।
(एचटीएमएल कोड में परिवर्तन करने से पहले अपनी टेम्पलेट का बैकअप जरूर रखें। इससे आप अपनी मूल टेम्पलेट फिर से पा सकते हैं।
कई बार ब्लॉग को आकर्षक बनाने और इसमें कुछ अच्छे फीचर जोड़ने के लिए इसकी टेम्पलेट के एचटीएमएल कोड के साथ छेड़छाड़ करनी पड़ती है। बदलाव को सेव करने से पहले उसका प्रिव्यू देखा जा सकता है, लेकिन अगर एक बार बदलाव सेव कर दिए जाएं, तो उसे फिर से पहले जैसा करना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। अगर बदलाव करने से पहले अपनी मूल टेम्पलेट को कंप्यूटर में डाउनलोड कर सेव कर लिया जाए तो वह आपके बैकअप के रूप में काम आ सकती है। जैसे ही आप बदलावों से ऊब जाएं, मूल टेम्पलेट को फिर से अपलोड कर लीजिए और आपका सदाबहार ब्लॉग फिर से तैयार)

 
 १) अपने ब्लॉगर खाते में प्रवेश करे
२) अब
Dashboard >> Layout >> Edit HTML. पर जाये “Expand Template Widgets” पर क्लिक करे यहाँ पर नीचे दिया कोड ढूंढे

<a expr:href='data:post.url'><data:post.title/></a>

३) यहाँ पर यह कोड आपको कुछ ऐसा मिलेगा ।


<a expr:href='data:post.url'>
<data:post.title/></a>

४) अब इस पुरे कोड को नीचे बताये कोड से बदले


<a expr:href='data:post.url'>
<img src='The direct URL of your image' style='border: 0; margin: 0; padding: 0;'/> &#160;
<data:post.title/></a>

५) ध्यान दे की
The direct URL of your image की जगह अपनी image का पता डालना न भूले।


६) परिवर्तन को सेव करे। ....

क्या आपको यह लेख पसंद आया? अगर हां, तो ...इस ब्लॉग के प्रशंसक बनिए !!

हाय महँगाई मार गयी !

View Image in New Window मनोज  जैसवाल :  पिछले दिनों में भारतीय मध्यवर्ग को दो बड़े झटके लगे। एक दिन पेट्रोल की कीमतें लगभग तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ गईं और अगले दिन रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें 0.25 प्रति बढ़ा दीं। पेट्रोल का सबसे बड़ा उपभोक्ता मध्यम वर्ग है, जो स्कूटर या कारों का इस्तेमाल करता है। ब्याज दरों के बढ़ने से उन लोगों पर बोझ पड़ेगा, जो मकान के कर्ज की किश्तें चुका रहे हैं और उन लोगों को फिर सोचना पड़ेगा, जो मकान या वाहन खरीदने की सोच रहे हैं। पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी का तर्क यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की कीमत गिरने से पेट्रोलियम पदार्थों का आयात महंगा हुआ है। पेट्रोल के दामों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में दामों से जोड़ना एक सही तर्क तब होगा, जब अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दाम भी बढ़ें। केरोसिन इसलिए नहीं महंगा किया जा सकता, क्योंकि उसे गरीबों का ईंधन माना जाता है। डीजल इसलिए महंगा नहीं किया जा सकता, क्योंकि ट्रक मालिकों की लॉबी बहुत ताकतवर है और वह अपनी लागत किसी भी तरह बढ़ने का जोरदार विरोध करती है। पेट्रोल का उपभोक्ता वर्ग असंगठित और राजनैतिक रूप से प्रभावशाली नहीं है, इसलिए सिर्फ उसी पर मार पड़े, यह कुछ अन्यायपूर्ण लगता है। जाहिर है, अनियंत्रित महंगाई के आंकड़ों पर भी पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी का असर पड़ेगा और मध्यम वर्ग का वह असंतोष भी बढ़ेगा, जो कि अन्ना हजारे के आंदोलन में दिखाई पड़ा था। बची-खुची कसर कर्जों की ईएमआई में बढ़ोतरी पूरी कर देगी। रिजर्व बैंक ने इस कदम से साफ कर दिया है कि उसके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण महंगाई को रोकना है, भले ही इस कोशिश में विकास की थोड़ी कुर्बानी देनी पड़े। पिछले लगभग सवा साल में रिजर्व बैंक ने बारह बार ब्याज दरें बढ़ाई हैं। इसका कुछ असर महंगाई पर पड़ता नहीं दिख रहा है, जो फिलहाल नौ प्रतिशत से ऊपर ही चल रही है, हालांकि पिछले महीनों के आंकड़े बताते हैं कि विकास दर पर इसका असर पड़ने लगा है। जुलाई में औद्योगिक विकास दर 3.3 प्रतिशत तक आ गई है, जो पिछले दो वर्षों में सबसे कम है। अगस्त में उद्योगों व सेवा क्षेत्र दोनों का विकास पिछले दो वर्षों में सबसे कम रिकॉर्ड किया गया। इसकी वजह सिर्फ घरेलू नहीं है, विश्व अर्थव्यवस्था भी जिम्मेदार है, बल्कि कठोर मौद्रिक नीति का भी इसमें योगदान है।
महंगाई की स्थिति कम से कम छह महीने तक खास सुधरने वाली नहीं है, इसलिए ब्याज दरों में कम से कम एक और बढ़ोतरी का अंदेशा जानकार लगा रहे हैं। गिरते विकास से जूझते उद्योग और व्यापार क्षेत्र भी लगातार बढ़ती ब्याज दरों से खुश नहीं हैं। पिछले वर्षों में जमीन, बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार को लेकर भी कोई बड़े फैसले नहीं हुए हैं, इससे भी औद्योगिक विकास थमा है। इसका अर्थ यह है कि भारत में उदारीकरण के बाद जिन वर्गों यानी उद्योगपतियों और मध्यम वर्ग को विकास का नेतृत्व करना था, वे दोनों ही असंतुष्ट हैं। महंगाई की मार मध्यम वर्ग तो किसी तरह बर्दाश्त कर लेता है, लेकिन गरीबों के लिए यह ज्यादा बड़ा सवाल है। विकास दर घटने का सीधा अर्थ रोजगारों में कमी और गरीबों के लिए अपना जीवनस्तर उठाने के अवसर सीमित हो जाना है, इसलिए हम यह भी नहीं कह सकते कि सरकारी नीतियों से गरीबों को लाभ हो रहा है। नरेगा जैसी योजनाओं का फायदा बेशक हुआ है, लेकिन उससे आगे बढने के अवसर तो बुनियादी ढांचे में सुधार और ठोस रोजगार से ही हासिल हो सकते हैं। मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना कोई हंसी खेल नहीं है, लेकिन यही वक्त है, जब सरकार कुछ साहसिक और कल्पनाशील फैसले करे, जिससे जनता का भरोसा बहाल हो और उसे राहत भी मिले।

बारिश ने घटाया इंग्लैंड का टारगेट :विराट कोहली ने सेंचुरी जड़ी

View Image in New Windowमनोज जैसवाल : कार्डिफ।। पूरी सीरीज में एक मैच भी न जीत सकने वाले भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी मैच में बेहतरीन खेल दिखाते हुए 304 रन बनाए। लेकिन बारिश की वजह से इंग्लैंड का टारगेट 47 ओवर में 295 कर दिया गया। भारत की तरफ से विराट कोहली ने सेंचुरी जड़ी। अपना आखिरी वनडे मैच खेल रहे राहुल द्रविड़ ने भी हाफ सेंचुरी लगाई। आखिरी ओवरों में ताबड़तोड़ बैटिंग करते हुए कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी हाफ सेंचुरी ठोकी।
भारत की तरफ से बैटिंग की शुरुआत करने के लिए पार्थिव पटेल और अजिंक्य रहाणे उतरे। दोनों ने रुक कर खेलने की रणनीति अपनाई, लेकिन रन-रेट भी धीमा रहा। अजिंक्य और पार्थिव ने 12 ओवर में 52 रन बनाए। 13वें ओवर की पहली ही गेंद पर रहाणे को डर्नबैच की गेंद पर फिन ने लपक लिया। रहाणे 26 रन बना पाए। 19 रन बना कर 16वें ओवर में पार्थिव भी आउट हो गए। पार्थिव को स्वान की गेंद पर ब्रेसनन ने कैच किया।
रहाणे और पार्थिव के बाद भारत की पारी को द्रविड़ और विराट कोहली ने संभाला। अपने आखिरी वनडे में राहुल द्रविड़ ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए हाफ सेंचुरी लगाई। 79 गेंद पर 69 रन बनाने के बाद द्रविड़ स्वान की गेंद पर बोल्ड हो गए। विराट कोहली ने 87 गेंद में सेंचुरी जड़ी। विराट ने 9 चौके और 1 छक्के की मदद से 107 रन बना कर आउट हुए। विराट कोहली स्वान की गेंद पर हिट विकेट हुए।


आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने के मकसद से सुरेश रैना और कप्तान धोनी उतरे। रैना 1 छक्के की मदद से 15 रना बना कर आउट हो गए। रैना को फिन की गेंद पर ब्रेसनन ने लपका। रैना के बाद आए रवींद्र जडेजा को पहली गेंद पर बोपारा ने लपक लिया। रवींद्र जडेजा डर्नबैच का शिकार बने।


धोनी ने आखिरी ओवरों में धुआंधार बैटिंग करते हुए 26 गेंद पर नाबाद 50 रन ठोक दिए। धोनी ने 5 चौके और 2 छक्के जड़े।


टॉस जीत कर इंग्लैंड ने भारत को बैटिंग का न्योता दिया। मैच शुरू होने से ठीक पहले थोड़ी बारिश हुई , जिसकी वजह से मैच करीब आधे घंटे देर से शुरू हुआ।


इंग्लैंड ने आखिरी ग्यारह खिलाड़ियों में तीन बदलाव करते हुए समित पटेल , जेड डर्नबाक और जॉनी बेयरस्टो को क्रिस ब्रॉड , जेम्स एंडरसन और बेन स्टोक्स की जगह शामिल किया।


भारत ने सिर्फ एक बदलाव किया। चोटिल प्रवीण कुमार की जगह विनय कुमार को शामिल किया गया।


5 वनडे की सीरीज में इंग्लैंड 2-0 की अजेय बढ़त हासिल किए हुए है। बारिश की वजह से सीरीज का 1 मैच रद्द हो गया था और 1 मैच टाई हो गया था।

यह भी देखे : टीम के संकटमोचक द्रविड़ ने वनडे क्रिकेट को अलविदा कहा !

एक दिवस हिंदी का : बाकी दिन तो उसे ‘सोना’ ही है

View Image in New Windowमनोज जैसवाल :यदि मेरा भाषा ज्ञान दुरुस्त है, तो सूर्योदय से सूर्यास्त के पीरियड यानी काल को हिंदी में दिवस कहते हैं। वैसे तो सभी दिवस तकनीकी रूप से एक समान होते हैं, पर अपवाद स्वरूप सरकार द्वारा कुछेक विशेष दिवस नामित हैं। जनवरी के गणतंत्र दिवस से शुरू ताजा बीता शिक्षक दिवस सरकार की शुद्ध उपज है। इस बीच शहीद दिवस, मजदूर दिवस, स्वतंत्रता दिवस इत्यादि अपनी उपस्थिति ऑलरेडी दर्ज करा चुके हैं।
एक दिवस और है-हिंदी दिवस, जो सितंबर मास में भरपूर सितम ढाता है कार्य-व्यवहार और बुखार की भाषा अंग्रेजी पर। निज भाषा उन्नति अहै की भावुकता की आड़ में इस दिन राष्ट्रभाषा का दुपट्टा अपने मातहतों के गले में जबरिया लपेट देती है सरकार। दो-चार बैनर पहले से ही कहने लगते हैं हिंदी दिवस (वैसे हिंदी सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा भी होते हैं और इनके बैनर भी आपको दिख जाएंगे)। इन दिनों हिंदी की जन्माष्टमी मनाई जाती है। सज-संवर उठती है हिंदी। सर्वत्र जय-जय। तदुपरांत अगले बरस तू जल्दी आ वाले भाव के साथ अंग्रेजी के समुद्र में विसर्जन।
दफ्तरों में हिंदी की धूम। हिंदी किताबों का मेला, प्रतियोगिताओं का रेला, हिंदी के उत्कर्ष के लिए कवि सम्मेलन। लगे हाथ मुशायरा भी। पत्रम पुष्पं अलहदा। सरकारी कामकाज में हिंदी की उपेक्षा पर टेसुए इसी दिन बहाए जाते हैं। पूरे साल अंग्रेजी के स्विमिंग पूल में तैराकी करने वाले इस दिन हिंदी के पोखर में डुबकी अवश्य लगाते हैं। खूंटी पर टंगी रह जाती है टॉवेल। बदन अंगोछे से पोंछा जाता है। आज भारत-भारती की भाषा हिंदी के प्रति अपनी विनम्र आदरांजलि व्यक्त करने का दिन है। हिंदी राजभाषा भी है और जनभाषा भी है। हिंदी का अपना समृद्ध इतिहास रहा है। हिंदी के द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है. महर्षि दयानंद की यह उक्ति हिंदी की चिर प्रासंगिकता को लक्ष्य करती है।

जब हम हिंदी भाषा के उद्भव एवं विकास के संबंध में पड़ताल करते हैं तो कई दिलचस्प तथ्य हमारे हाथ लगते हैं। हिंदी शब्द की उत्पत्ति सिंधु से जुड़ी हुई है। सिंधु नदी के आसपास का क्षेत्र सिंध प्रदेश कहलाता है। यही शब्द ईरानियों के संपर्क में आकर हिंदू या हिंद हो गया। हिंद से ही हिंदीक बना है, जिसका अर्थ है हिंद का। यूनानी शब्द इंडिका या अंग्रेजी शब्द इंडिया इसी हिंदीक की ही उपज है।

हिंदी साहित्य का प्रारंभ 1000 ईस्वी के आसपास माना जाता है। इससे पूर्व का हिंदी साहित्य अपभ्रंश में है, जिसे हिंदी की पूर्व पीठिका माना जा सकता है। 1500 ईस्वी के आसपास हिंदी स्वतंत्र रूप से विकसित हुई और हिंदी में लेखन का प्रचलन बढ़ा।

हिंदी पर शुद्धतावाद के निंदनीय आरोप लगते रहे हैं। आरोप लगाने वाले कृपया ध्यान दें कि सांस्कृतिक संश्लेष न केवल भारतीय संस्कृति बल्कि हिंदी भाषा की भी सबसे बड़ी विशेषता है और उसने विश्व की अनेक भाषाओं की शब्दावली को आत्मसात किया है।

मुगलों के भारत आगमन के पश्चात हिंदी के सौष्ठव में आमूलचूल परिवर्तन हुआ। मुगलों की भाषिक संस्कृति का सीधा प्रभाव हिंदी पर पड़ा, जिसके फलस्वरूप फारसी के लगभग 3500 शब्द, अरबी के 2500 शब्द, पश्तो के 50 शब्द तथा तुर्की के 125 शब्द हिंदी भाषा की शब्दावली में शामिल हुए।

ठीक इसी प्रकार अंग्रेजों सहित यूरोपियन साम्राज्यवादियों के भारत आगमन के बाद कई यूरोपीय भाषाओं के शब्द हिंदी का हिस्सा बने। कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिंदी लगातार समृद्ध हो रही थी। हिंदी ने कई देशज शब्दों को भी अपनी मुख्यधारा में समाहित कर लिया। इससे उसका अभिव्यक्ति पक्ष और पुष्ट हुआ।

हिंदी में रचे गए उच्च कोटि के साहित्य को विश्व पटल पर प्रशंसा मिली। भारत को एक सूत्र में पिरोने की बात की जाए तो गुलामी के दिनों हिंदी ने यह भूमिका भी बखूबी निभाई थी। महात्मा गांधी स्वयं गुजरात से थे और वे अनेक वर्ष विदेश में रहे थे, लेकिन उन्होंने हिंदी और हिंदुस्तानी पर हमेशा बल दिया। हिंद, हिंदी और हिंदुस्तान एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे। आज एक स्वतंत्र भारत के नागरिक होने के हमारे गौरव में हिंदी की अस्मिता का भी एक बड़ा योगदान है।

लेकिन यह देखकर वेदना होती है कि हमारी हिंदी को लगातार हाशिये पर धकेला जा रहा है। वैश्वीकरण की आड़ में विश्व भाषा का आग्रह पुख्ता हुआ है। मैं इसका विरोधी नहीं, लेकिन यह आग्रह जिस तरह हमारी भाषा की अस्मिता पर लगातार प्रहार कर रहा है, उससे जरूर मन को ठेस पहुंचती है।

दुनियाभर के देश अपनी-अपनी भाषाओं की विलक्षणता का उत्सव मनाते हैं, लेकिन अपनी ही राष्ट्रभाषा के प्रति ऐसा पूर्वग्रहग्रस्त हेय व्यवहार भारत के अलावा और कहीं देखने को नहीं मिलेगा। वर्तमान में हिंदी की दुर्दशा के लिए हिंदी पट्टी भी कम जिम्मेदार नहीं है, जिसने अपनी भाषिक संस्कृति के विकास में अपेक्षित रुचि नहीं ली।

यही वजह रही कि हिंदीतर प्रदेशों में अपनी राष्ट्रभाषा के प्रति विद्वेष के दृश्य देखे जा सकते हैं। हमें यह समझना होगा कि हिंदी हाशिये की भाषा नहीं है, वह किसी एक वर्ग या क्षेत्र का संस्कार नहीं है, वह हमारी राष्ट्रभाषा है और राष्ट्रभाषा की एक सर्वमान्य स्वीकृति होती है, होनी चाहिए। ऐसा होगा तो ही हिंदी हमारी बिंदी यानी हमारा अलंकार और हमारा आभूषण बन पाएगी।

संबंधियों के साथ है मायावती की आपराधिक साठ-गांठ: सीबीआई

View Image in New Windowमनोज जैसवाल : उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती और उनके परिजनों के बीच आपराधिक साठ-गांठ का आरोप लगाते हुए सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय को मंगलवार को बताया कि उनके खिलाफ अर्जित आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला आय कर विभाग के नतीजों के आधार पर बंद नहीं किया जा सकता।
सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय में पेश ताजा हलफनामे में मायावती के इस रुख को खारिज कर दिया कि अर्जित आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले को खत्म कर दिया जाना चाहिए क्योंकि आय कर अधिकारियों ने आय कर संबंधी उनके आकलन को स्वीकार कर लिया है।
एजेंसी ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच दस्तावेजी और मौखिक सबूतों के रूप में ठोस सबूत उपलब्ध हैं जो यह प्रदर्शित करते हैं कि याचिकाकर्ता और उनके परिजनों तथा मायावती और उनके दानदाताओं एवं परिजनों के बीच आपराधिक साठ-गांठ है।
मायावती ने इससे पहले आयकर अपीली न्यायाधिकरण द्वारा दी गयी क्लीन चिट के आधार पर उच्चतम न्यायालय में एक आवेदन कर अपने खिलाफ सीबीआई के मुकदमे को खत्म करने की मांग की थी। सीबीआई ने न्यायालय को बताया कि वह जल्द ही लखनऊ की अदालत में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के समक्ष मायावती के खिलाफ आरोप पत्र दायर करेगी।

हर नागरिक को सरकारी सेवाएं एक लिखित समयावधि में पाने का हक हो !

मनोज जैसवाल :सरकार में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण सरकारी कर्मचारियों के हाथों में नागरिकों के जायज कामों को लटकाने का अघोषित अधिकार है। चाहे पेंशन पाना हो या बिजली का कनेक्शन लेना या राशन कार्ड बनवाना, बिना रिश्वत दिए ये काम करवाना तकरीबन असंभव है। इसकी बुनियादी वजह यह है कि किसी काम को बिना वजह लटकाने के लिए सरकारी कर्मचारियों की कोई जवाबदेही नहीं है। इसीलिए अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की एक प्रमुख मांग ऐसा सिटीजन्स चार्टर लागू करवाना थी, जिसके तहत हर नागरिक को सरकारी सेवाएं एक लिखित समयावधि में पाने का हक हो और ऐसा न होने पर दोषी सरकारी कर्मचारियों को सजा मिले। जन लोकपाल विधेयक पर जितना भी विवाद हो, लेकिन सिटीजन चार्टर एक ऐसा विचार है, जिसका वक्त आ गया है। केंद्र सरकार तो इस पर गंभीरता से विचार कर ही रही है, लेकिन बिहार व मध्य प्रदेश सरकारों ने ऐसा कानून लागू भी कर दिया है। पंजाब सरकार ने भी कई सरकारी सेवाओं के लिए ‘सेवा का अधिकार’ कानून लागू किया है। दिल्ली सरकार ने भी 15 सितंबर से ऐसा कानून लागू करने की घोषणा की है, जिसके तहत कई सरकारी सेवाओं के लिए समय-सीमा तय कर दी है। अगर बिना उचित कारण के कोई सरकारी कर्मचारी इन सेवाओं में देर करता है, तो उसे हर दिन के हिसाब से जुर्माना देना पड़ेगा। दिल्ली में यह कानून काफी पहले पास हो गया था, लेकिन शायद भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रभाव से यह सब लागू हो जाएगा। ओडिशा और असम की सरकारों ने यह घोषणा की है कि जल्दी ही वे भी ऐसा कानून लागू करेंगी। अगर इस तरह जनता का दबाव बना रहा, तो संभव है कि तमाम राज्य सरकारों को यह कानून बनाना पड़े। केंद्र में जब लोकपाल बिल बनेगा, तो उसमें एक व्यापक केंद्रीय सेवा कानून भी होगा, यह लगभग तय है। अगर पूरे देश में ऐसे कानून लागू हो जाएं, तो शायद उनका प्रभाव नागरिकों के हक में सूचना के अधिकार से कहीं ज्यादा होगा।
सारे देश में भ्रष्टाचार के विरोध में जिस तरह जनता उठ खड़ी हुई है, उससे यह साफ है कि भ्रष्टाचार जनता को सबसे ज्यादा सताने वाला मुद्दा है। पहले भी जब कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन हुआ है, तो लोगों का उसको व्यापक समर्थन मिला है। ऐसा भी नहीं है कि भ्रष्टाचार सिर्फ मध्यवर्ग या उच्च जातियों का मामला है, बल्कि रसूख या जान-पहचान की वजह से वे लोग तो कभी-कभार भ्रष्टाचार से बच भी जाते हैं, लेकिन गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को तो कदम-कदम पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। आम जनता को जिस भ्रष्टाचार से रोज-रोज रूबरू होना पड़ता है, वह कोई अंतरराष्ट्रीय सौदों में करोड़ों, अरबों का भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि नौकरशाही के स्तर पर, बल्कि छोटे स्तर की नौकरशाही से स्तर पर होने वाला भ्रष्टाचार है। इसकी मुख्य वजह यह है कि हमारी नौकरशाही का पूरा ढांचा और मिजाज औपनिवेशिक काल का है, जब देश में विदेशी हुकूमत थी। उस वक्त सरकार का काम भारतीय जनता पर राज करना था और उसकी इस जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं थी। आजादी के 64 वर्षो बाद भी नौकरशाही का चरित्र नहीं बदला है और यही वजह है भ्रष्टाचार के पनपने की। हमारे यहां तमाम नियम-कानून हैं, जो सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हैं, लेकिन सरकारी सेवाओं पर जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कानून नहीं हैं। यह धारणा जब तक सरकारी सेवाओं में नहीं बनेगी कि सरकार का काम राज करना नहीं, जनता की सेवा करना है, तब तक सरकारी सेवाओं में संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार बना रहेगा। अभी बहुत आगे जाना है, लेकिन हम आगे तो बढ़ ही रहे हैं।

जय भारत यह है इन कायरो को मेरा जबाब !

मनोज जैसवाल :दिल्ली में हुए आतंकवादी हमले की हम निंदा करते है। आतंकवाद के इस ‘नृशंस’ कृत्य को आपराधिक और अन्यायसंगत है। इस समय हम देश के लोगों और सरकार के साथ हैं। नागरिकों के खिलाफ ऐसी हिंसा को किसी प्रकार से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। हम आशा करते है कि हमले को अंजाम देने वालों को कानून की जद में लाया जाएगा।इस हमले से हम निराश ज़रुर है लेकिन डरे नहीं है इस का जबाब
हम इन कायरो को अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर भारतीय तिरंगे को लगा कर दे सकते है !
भारतीय तिरंगे को ब्लॉग या वेब साईट पर किसी विशिष्ट कोने पर कैसे लगायें? तो यह ख़ास पोस्ट आपके और आपके हर जिज्ञासु के लिए जिसको अपने ब्लॉग पर भारतीय झण्डा मनमुताबिक किसी भी कोने पर लगाना है। आशा है आप सभी आसानी से समझ जायेंगे।
View Image in New Window
तिरंगा बायीं ओर ऊपर कोने में









तिरंगा बायीं ओर निचले कोने में








तिरंगा दायीं ओर ऊपर कोने में









तिरंगा दायीं ओर निचले कोने में










कैसे जोड़े इस ब्लॉग से?

चरण एक: अपने डैश बोर्ड पर जायें और लेआउट(Layout) पर क्लिक करें और तत्पश्चात गैजेट जोड़े(Add a Gadget) पर क्लिक करें



चरण एक 1
View Image in New Window


चरण दो: गैजेट जोड़े(Add a Gadget) पर क्लिक करने के बाद जावा/एच.टी.एम.एल(Java/HTML) विजेट का चुनाव करें

View Image in New Window


चरण तीन: अब शीर्षक स्थान को ख़ाली छोड़ दें और दर्शाये गये स्थान पर स्क्रिप्ट चिपका(Paste) दें और उसे सहेज(Save कर) दें।


लीजिए जुड़ गया भारतीय तिरंगा आपके ब्लॉग पर, जय भारत!



यह है इन कायरो को मेरा जबाब !
आपका मनोज जायसवाल(manojjaiswalpbt)

सरकार नाकारा, विपक्ष लापरवाह और आतंक झेलने को अभिशप्‍त जनता

मनोज जैसवाल : केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में देश कम से कम आठ धमाके झेल चुका है। जानकारों की राय में बार-बार ऐसी घटनाओं का सबसे बड़ा कारण यही है कि सरकार कोई सबक नहीं लेती, विपक्ष भी हर हमले के कुछ दिन बाद मामला भुला देता है। ऐसे में बेचारी जनता बेबस, आतंक झेलने के लिए मजबूर बनी रहती है।

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर 18 साल पहले 1993 में पहला बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था। इसके बाद से अकेले मुंबई में करीब 10 आतंकी हमले हो चुके हैं, जिनमें 700 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हर हमलों के बाद जांच शुरू होती है। कुछ मामलों में दोषी करार दिए जाने के बावजूद उस शख्‍स को सजा नहीं मिलती। मुंबई हमलों का दोषी अजमल आमिर कसाब और संसद पर हुए आतंकी हमले (2001) में फांसी की सजा पा चुका अफजल गुरू तो दो मिसाल भर हैं।

इसके उलट, अमेरिका का उदाहरण हमारे सामने है। दुनिया का ‘सुपरपावर’ कहे जाने वाले अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 को भीषण आतंकवादी हमला हुआ था। उसके बाद भी वहां आतंकियों ने कई बार हमले की कोशिश की, लेकिन सरकार ने हर बार समय रहते उन्‍हें बेनकाब किया। ‘हेरिटेज फाउंडेशन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक 11 सितंबर को हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिकी सुरक्षा तंत्र ने अमेरिका के खिलाफ 39 आतंकी हमलों की साजिश को नाकाम किया है। इनमें 11 अकेले न्‍यूयॉर्क पर होने वाले थे।

View Image in New Window

आतंक के खिलाफ जंग

9/11 के बाद अमेरिका की तस्‍वीर ही बदल गई थी। पुलिस और पूरे सुरक्षा तंत्र का चेहरा बदल दिया गया। सुरक्षा के नाम पर कई मुश्किल (जिनसे जनता को परेशानी भी हुई) नियम लागू किए गए। हमले के तुरंत आतंक के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया गया और 10 साल बाद अमेरिका के गुनहगार ओसामा बिन लादेन को पाकिस्‍तान में घुसकर मार भी गिराया। इसके उलट, भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को दिल्‍ली हाईकोर्ट के बाहर हुए धमाके के बाद कहा कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध लंबा है। प्रधानमंत्री का यह बयान तब है, जब भारत 20 साल से लगातार आतंकवादी हमले झेल रहा है.

भारत में मुश्किल है, पर नामुमकिन नहीं

9/11 के बाद अमेरिका में सुरक्षा के लिहाज से जो कड़े प्रावधान लागू किए गए, वैसे नियम भारत में भी लागू हो सकते हैं। जरूरी है सरकार की इच्‍छाशक्ति और जनता का त्‍याग के लिए तैयार रहना। अमेरिका जैसे नियम लागू किए गए तो यहां जनता को कई ऐसी परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं, जिसकी वह अभ्‍यस्‍त नहीं है। उसे हमेशा अपने साथ पहचान पत्र लेकर चलना पड़ सकता है और कहीं भी मांगे जाने पर सुरक्षा बलों को दिखाना पड़ सकता है। मॉल, सिनेमाघरों, पार्किंग, स्‍टेशन आदि सार्वजनिक जगहों पर उसे कतार में कई मिनट तक खड़े रह कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ सकता है। हो सकता है कि कुछ खास इलाकों (जैसे दिल्‍ली में कनॉट प्‍लेस) में निजी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी झेलनी पड़े और सार्वजनिक वाहनों से ही आवाजाही करनी पड़े।

चुनौती

अमेरिका की तुलना में भारत की आबादी कहीं ज्‍यादा है, लोग कम जागरूक हैं, बुनियादी ढांचे की कमी है और पैसे की भी समस्‍या है। बड़ी आबादी के मद्देनजर सुरक्षा संबंधी इंतजामों के लिए काफी पैसों की जरूरत पड़ेगी। सो, यहां जनता को सुरक्षित रहने की आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ेगी। हालांकि इस बात की संभावना कम ही है कि जनता यह कीमत चुकाने को तैयार नहीं होगी, पर सबसे बड़ी समस्‍या नेताओं और सरकारी तंत्र की इच्‍छाशक्ति की है।

दिल्‍ली हाईकोर्ट के बाहर हुए सात सितंबर को बम धमाके में भी यही कमी सामने आई। तीन महीने पहले एक धमाका होने के बावजूद हाई कोर्ट के दरवाजों पर सीसीटीवी नहीं लगाए जा सके। मेटल डिटेक्‍टर लगा है तो काम ही नहीं कर रहा। मुंबई हमले के बाद सुरक्षा संबंधी तैयारियों की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गईं, लेकिन उन पर अमल का हाल बुरा है। यहां तक कि समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए खरीदे गए बोट को चलाने के लिए ईंधन का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।

सरकार की प्राथमिकता में जनता की सुरक्षा का मामला काफी नीचे दबा लगता है। विपक्षी पार्टियां भी इसे जोर-शोर से नहीं उठातीं। किसी आतंकी हमले के तत्‍काल बाद तो वे शोरशराबा करती हैं, लेकिन मामला ठंडा पड़ते ही वे भी दूसरे मुद्दों को पकड़ लेती हैं। ऐसे में जनता की आवाज और जरूरत दबी की दबी रह जाती है।


विशेषज्ञों की सोच

सरकार हर धमाके के बाद मुआवजे का ऐलान कर छुट्टी पा लेती है। सुरक्षा को लेकर उसका नजरिया बहुत ही चलताऊ है। अभी कुछ ही दिन पहले मुंबई की समुद्री सीमा में एक जहाज आ गया, लेकिन गृह मंत्री कहते हैं कि यह सुरक्षा में सेंध नहीं है। तो क्‍या जब वे नॉर्थ ब्‍लॉक पहुंच जाएंगे, तभी हम मानेंगे की हमारी सुरक्षा भेदी गई है। ऐसा रवैया रहा तो लोगों में गुस्‍सा भड़कने का भी खतरा बना रहेगा।

भरत वर्मा , सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ

आतंकवाद को रोकने में हर एक को भागीदार बनाना होगा। प्रत्‍येक पुलिस वाले, प्रधान, चुने गए प्रतिनिधि और हर उस शख्‍स को जिसका इससे संबंध हो। इसके लिए जरूरी हो कि हमारे पास ऐसा नेतृत्‍व हो जिस पर हम भरोसा कर सकें। अहम पदों पर हमें ऐसे लोगों को बैठाना होगा, जिनके लिए सरकार में सेवा करने का कोई बड़ा मकसद हो, न कि उनका मकसद केवल लेनदेन तक सीमित हो। इस बार जब तक गुनहगार को सजा नहीं मिल जाता तब तक हम सबको चैन से नहीं बैठना चाहिए।

किरण बेदी, देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी

 देल्ली में आतंकी विस्‍फोट हमारी न्‍यायपालिका (जिसने गुनहगारों को सजा दी है) पर सुनियोजित हमला है। ऐसी घटनाएं (आतंकी हमले) बहुत ज़्यादा हो रही हैं और हम इन्हें अंजाम देने वालों को पकड़ नहीं पा रहे हैं। यह जरूरी हो गया है कि समाज में खोया हुआ भरोसा बहाल किया जाए।

मायावती जहाज भेजें, इंग्लैंड से लाऊंगा सैंडल

मनोज जैसवाल :लंदन। विकिलीक्स के खुलासे से खफा यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के बयान पर इसके संस्थापक जूलियन असांजे ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मायावती को अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। गौरतलब है कि मायावती ने उन्हें पागलखाने भेजने की बात कही है।

मायावती मांगें माफी
असांजे ने कहा कि मायावती को अपनी गलती मानकर इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मायावती ने एक विचारधारा के साथ छल किया है। सवाल यह है कि क्या उन्होंने दलितों के साथ धोखा किया है? इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये आधिकारिक दस्तावेज अमेरिकी दूतावास के हैं। दुनियाभर में ये दस्तावेज सही साबित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर मायावती को विकिलीक्स के दस्तावेज की सामग्री से कोई समस्या है तो वह इस बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से बातचीत कर सकती हैं।

भारत से करता हूं प्यार
असांजे ने कहा कि मायावती उन्हें लाने के लिए निजी विमान इंग्लैंड भेज सकती हैं, जहां में पिछले 272 दिन से अपने ही घर में नजरबंद हूं। मुझे भारत में पागलखाने में रहना और राजनीतिक शरणार्थी बने रहने में खुशी होगी, क्योंकि मैं इस देश से प्यार करता हूं। उन्होंने कहा कि लौटते वक्त वह बढ़िया ब्रिटिश जूते-चप्पलों की पूरी रेंज लेकर आएंगे।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों के जरिए विकिलीक्स ने खुलासा किया था मायावती ने किस तरह अपनी पसंदीदा सैंडल मंगाने के लिए मुंबई अपना निजी खाली हवाई जहाज भेजा था।

हमारे गरीब देश के अमीर नेताओ की एक सबसे शानदार नमूना है यह खबर जरा पढिये !

 मनोज जैसवाल : हमारे गरीब देश के अमीर नेताओ की एक सबसे शानदार नमूना है यह खबर जरा पढिये सोचिये क्या इन नेताओ को हम पर शासन करने का हक़ है ?
मायावती ने चप्‍पल लेने मुंबई भेजा विमान, हर बार गुजरने के बाद धुलवाती हैं सड़क'

विकीलीक्स का खुलासा: माया मैडम तानाशाह, जेट प्लेन से आती है सैंडल

'चप्पल मंगाने के लिए माया ने भेजा था प्लेन'


नई दिल्ली. अमेरिका उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को तानाशाह मानता है। अमेरिका के ये विचार विकीलीक्स के जरिए सामने आए अमेरिकी दूतावास के गुप्त राजनयिक संदेशों में दर्ज हैं। 13-17 अक्टूबर, 2008 के बीच अमेरिकी दूतावास की तरफ से एक राजनीतिक प्रतिनिधि ने उत्तर प्रदेश के हालात का जायजा लेने सूबे के तीन शहरों-लखनऊ, वाराणसी और कानपुर की यात्रा की थी। इस यात्रा के आधार पर 23 अक्टूबर, 2008 को अमेरिका के विदेश मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक, 'मुख्यमंत्री मायावती तानाशाह बन चुकी हैं और प्रदेश की कानून व्यवस्था बस इसी मायने में सही हुई है कि अब भ्रष्टाचार का केंद्रीयकरण हो गया है और इसकी डोर सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के हाथों में आ गई है।'

अमेरिकी केबल यह भी कहता है कि मायावती के राज में भ्रष्टाचार संस्थागत हो गया है। गुप्त दस्तावेज के मुताबिक, 'मायावती और उनकी पार्टी ने सत्ता हासिल करने के बाद प्रदेश के विकास के लिए बहुत कम काम किया है। राज्य में नौकरशाह, पत्रकार डरे सहमे रहते हैं। मायावती सूबे से जुड़ा हर छोटा बड़ा फैसला या तो खुद करती हैं या फिर उनका बहुत ही सीमित दायरे वाला समूह। मायावती को अपनी सुरक्षा का डर सताता है। यही वजह है कि उनका खाना बनाने के लिए 9 कुक रखे गए हैं, जिसमें सिर्फ दो खाना बनाते हैं और बाकी 7 खाना बनता हुआ देखते हैं। मायावती को इससे भी संतोष नहीं होता है। खाना बनने के बाद वे दो फूड टेस्टर से उसकी जांच करवाती हैं। मायावती की शाहखर्ची का आलम यह है कि एक बार उन्होंने सैंडल की एक जोड़ी लेने के लिए एक जेट विमान मुंबई भेज दिया था। मायावती को प्रधानमंत्री बनने की धुन सवार है। रिपोर्ट के मुताबिक मायावती से ब्राह्मण और मुस्लिम वोट बैंक खिसक रहा है लेकिन उनका मुख्य आधार दलित आज भी उनके साथ हैं।

शाहखर्च और सुरक्षा के प्रति सतर्क
अमेरिकी केबल के अनुसार मायावती 'किसी भी राज्य पहली ऐसी मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपने घर से दफ्तर के लिए निजी सड़कें बनवाईं। मायावती की रईसी का आलम यह है कि यहां से गुजरने के बाद इस सड़क की सफाई की जाती है। यहां तक माया ने विरोधियों द्वारा जहर दिए जाने की आशंका के मद्देनजर एक फूड टेस्टर की नियुक्ति तक कर रखी है, जो माया के खाने-पीने की चीजों की जांच करता है।
सत्ता पर सीधा नियंत्रण
अमेरिकी दस्तावेज के मुताबिक मायावती सत्ता पर सीधे तौर पर नियंत्रण रखना पसंद करती हैं। राज्य के हर फैसले उनके कार्यालय से होकर गुजरने चाहिए। ऐसा न होने पर वे सख्त हो जाती हैं। लखनऊ के पत्रकार के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार एक मंत्री ने मायावती को बिना बताए राज्यपाल को किसी कार्यक्रम में बुला लिया था। मायावती ने उस मंत्री को अपने सामने उठक-बैठक करवा दी थी। यही नहीं, जब मायावती को पता चला कि उनके एक अधिकारी की बेटी कांग्रेस पार्टी में शामिल हुई है तो उन्होंने अधिकारी को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था।
भ्रष्टाचार
केबल में कहा गया है कि मायावती के राज में बदमाशों के गैंग एक-दूसरे पर गोलियां चलवाने के लिए पैसे देते हैं। यही नहीं, लोकसभा चुनाव में बीएसपी का टिकट लेने के लिए किसी कैंडिडेट को 250,000 अमेरिकी डॉलर (करीब एक करोड़ रुपये) देने होते हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार के साथ होने वाली हर बड़ी 'डील' में 'हिस्सा' होता है। रिपोर्ट के अनुसार सूबे के कई उद्योगपतियों ने गुजरात के मुख्यंत्री नरेंद्र मोदी की इस मामले जमकर प्रशंसा की।
कार्रवाई का डर
अमेरिकी केबल के मुताबिक मायावती मीडिया से बहुत कम मुखातिब होती हैं और जब भी वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हैं, पत्रकारों को सवाल पूछने की इजाजत नहीं होती है। रिपोर्ट के मुताबिक दूतावास के प्रतिनिधि ने सूबे के कई पत्रकारों से बातचीत की थी। इन पत्रकारों के मुताबिक राज्य के अफसर अपनी कुर्सी बचाने के लिए पत्रकारों से बात नहीं करते हैं। पत्रकारों ने माना है कि अगर वे मायावती या उनकी सरकार के खिलाफ कोई खबर लिखते हैं तो उन्हें बदले की कार्रवाई का डर रहता है। ज़्यादातर अफसरों और पत्रकारों के फोन टेप किए जाते हैं।
जाति आधारित राजनीति की धूम
गुप्त राजनयिक दस्तावेज के मुताबिक मई, 2007 में दलित, ब्राह्मण और कुछ मुस्लिमों के गठजोड़ के दम पर सत्ता में आईं मायावती के साथ आज भी दलित हैं। क्योंकि समाज के इस वर्ग को लगता है कि उनके समाज से एक महिला मुख्यमंत्री बनी है, जिससे उन्हें गौरव का एहसास होता है। केबल में किए गए आकलन के अनुसार सूबे में कांग्रेस के के पतन, बीजेपी के कमजोर होने और समाजवादी पार्टी के शासन में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति के चलते समाज का उच्च तबका बीएसपी की तरफ गया।


पीएम बनने की संभावना
केबल में मायावती के प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बारे में कहा गया है कि यह तभी संभव लगता है जब कांग्रेस और बीजेपी-दोनों राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही खराब प्रदर्शन करें। बीएसपी शानदार प्रदर्शऩ करे और क्षेत्रीय पार्टियां भी अच्छी संख्या में सीटें जीतें। ऐसा होने पर मायावती तीसरे मोर्चे को बनाकर सत्ता पर काबिज हो सकती हैं। केबल मानता है कि जाति आधारित राजनीति करने में मायावती का कोई मुकाबला नहीं है।
PTI 

प्रधानमंत्री के ढाका दौरे से सम्बंधों को मिलेगी नई दिशा

मनोज जैसवाल। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंगलवार को शुरू होने वाली बांग्लादेश की यात्रा से विशेषज्ञों को दोनों देशों के सम्बंधों को एक नया मुकाम मिलने की उम्मीद है।

सिंह की दो दिवसीय यात्रा (6-7 सितम्बर) में उनके साथ देश के पांच पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्री भी होंगे। ये राज्य हैं पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम।

उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच सीमा से सम्बंधित लम्बित विवादों को सुलझाने के लिए बात हो सकती है।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच तीस्ता और फेनी नदियों के जल बंटवारे को लेकर भी वार्ता होने की उम्मीद है। यात्रा में दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए भी बात हो सकती है। वर्ष 2010-11 में भारत ने बांग्लादेश को 3.84 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि आयात 40.63 करोड़ डॉलर का था।
View Image in New Window
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सीकरी ने इस यात्रा से दोनों देशों के सम्बंध बेहतर होने की उम्मीद जताई, जबकि विदेश नीति विशेषज्ञ अरविंद गुप्ता ने कहा कि दोनों देशों को आपसी सहयोग के नए रास्ते खोजने चाहिए।

बांग्लादेश के चटगांव विश्वविद्यालय के मुहम्मद फरीदुल आलम ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं को सामाजिक संस्थाओं के मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए।

सीकरी ने कहा कि दोनों देशों के बीच आम लोगों के सम्बंध बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है।

चटगांव विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय सम्बंध विभाग के अध्यक्ष आलम ने कहा कि इस यात्रा में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात होने की सम्भावना है, जैसे, सीमा पर तार लगाना, मोंगला बंदरगाह का इस्तेमाल, बिजली सहयोग और व्यापार।

उन्होंने कहा कि अगली बार इस तरह की शिखर वार्ता से पहले सामाजिक संस्थाओं के भी विचार लिए जाने चाहिए।

इस साल जून में प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी से दोनों देशों के बीच खटास की स्थिति आ गई थी कि बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं हैं।

माना जा रहा है कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के सम्बंध वापस पटरी पर आ जाएंगे.

Reed More in English

सरकार में सबसे अमीर सिब्बल तो सबसे गरीब एंटनी!

मनोज  जैसवाल । पिछले काफी समय से मनमोहन सरकार के भ्रष्टाचारी मंत्रियों ने सुर्खियों में जगह बनायी हुई थी। लेकिन किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की आखिर इन मंत्रियों के पास पैसा कितना है? आपको जानकर हैरत होगी कि यूपीए सरकार के आधे से ज्यादा मंत्री अरबपति है। अरे ये मै नहीं कह रहे हैं बल्कि पीएमओ ऑफिस की वेबसाइट पर जारी मंत्रियों के चल-अचल संपत्ति के ब्यौरे कह रहे हैं।

जिसके मुताबिक यूपीए सरकार के अमीर मंत्रियों में एचआरडी मिनिस्टर कपिल सिब्बल, नागरिक और उड्टयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और एम के अलागिरी का नाम सबसे ऊपर है जबकि सबसे गरीब मंत्री हैं रक्षामंत्री एके एंटनी।

कपिल सिब्बल के पास 35 करोड़ रुपये की चल−अचल संपत्ति है। उनके पास बेंगलुरु, दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव में जमीन और सिकंदराबाद, पटना, दिल्ली और गुड़गांव में घर हैं। उनके पास टोयोटा कोरोला, ह्युंडई सोनाटा समेत 5 गाड़ियां हैं। जबकि रक्षा मंत्री एंटनी के बाद ना तो घर है और ना ही गाड़ी।
View Image in New Window
जो डेटा उपलब्द्ध कराया गया है उसके मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास करीब 5 करोड़ 10 लाख 66 हजार 34 रुपये की संपत्ति है। उनके पास अपनी गाड़ी के रूप में सिर्फ मारुति 800 कार है। पीएम साहब के पास ना तो कोई खेती के लिए जमीन हैं और ना ही इफरात बैंक बैलेंस।

मनमोहन सिंह के पास दिल्ली के वसंत कुंज में एक फ्लैट है, जिसकी कीमत करीब 90 लाख रुपये है। इसके अलावा उनके पास चंडीगढ़ में एक फ्लैट और एक घर हैं, जिनकी मौजूदा कीमत 90 लाख रुपये है। पीएम की पत्नी गुरशरण कौर के पास 11 लाख से अधिक जमा राशि और करीब पौने 3 लाख रुपये के सोने के जेवर हैं।

तो वहीं वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी और उनकी पत्नी के पास 3 करोड़ दो लाख रुपये की संपत्ति है। प्रणब के पास दिल्ली के मुनिरका में एक फ्लैट है, जिसकी कीमत करीब 39 लाख रुपये है। साथ ही उनके पास एक फोर्ड आइकॉन कार भी है। गृहमंत्री पी चिदंबरम के पास 18.78 करोड़ की संपत्ति है।

कृषिमंत्री शरद पवार की अचल संपत्ति करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये है, जबकि उनकी पत्नी की अचल संपत्ति करीब 97 लाख रुपये है। पैतृक संपत्ति के नाम पर पवार परिवार के पास 1 करोड़ 65 लाख रुपये भी हैं। शरद पवार के पास कोई कार नहीं है। आपको बता दें कि यूपीए सरकार के सभी मंत्रियों को अपनी संप्तत्ति की जानकारी 31 अगस्त तक पीएमओ को उपलब्द्ध करानी थी लेकिन मात्र पांच लोगों ने ही ये जानकारी दी है।

Aarakshan (2011) – Hindi Movie Watch Online


By मनोज जैसवाल : Starring - Vinay Apte, Amitabh Bachchan, Manoj Bajpai, Darshan Jariwala, Anita Kanwar, Saif Ali Khan, Hema Malini, Deepika Padukone, Gyanesh Pandey, Chetan Pandit, Prateik, Yashpal Sharma

Director - Prakash Jha

Genre - Drama, Social, Thriller

Movie Info -

Movie Description - Not Available
Aarakshan 2011 Hindi Movie Watch Online

Host Server 1 - Dailymotion

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4
Watch Online Part 5
Watch Online Part 6
Watch Online Part 7
Watch Online Part 8

Host Server 2 - Hostingbulk

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4
Watch Online Part 5
Watch Online Part 6
Watch Online Part 7
Watch Online Part 8

Host Server 3 - Hostingcup

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4
Watch Online Part 5
Watch Online Part 6
Watch Online Part 7
Watch Online Part 8

Host Server 4 - Dailymotion

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4

Host Server 5 - Megavideo

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4

Host Server 6 - Videoweed

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4

Host Server 7 - Novamov

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3

Host Server 8 - Movshare

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4

Host Server 9 - Dailymotion

Watch Online Part 1
Watch Online Part 2
Watch Online Part 3
Watch Online Part 4
Watch Online Part 5
Watch Online Part 6
Watch Online Part 7
Watch Online Part 8

Host Server 10 – Videobb

Watch Online Full Movie

Host Server 11 – Videobb

Watch Online Full Movie

Host Server 12 – Videozer

Watch Online Full Movie

Host Server 13 – Youtube

Watch Online Full Movie

Host Server 14 – Youtube

Watch Online Full Movie

Host Server 15 – Youtube

Watch Online Full Movie

Host Server 16 – Youtube

Watch Online Full Movie

Host Server 17 – Movshare

Watch Online Full Movie

Host Server 18 – Novamov

Watch Online Full Movie
This movie may be available for download - Click here to try

View Image in New Window
Widget by:Manojjaiswal

All-Time

Online Marketing
Praca poznań w Zarabiaj.pl
 

Blog Directories

About The Author

Manoj jaiswal

Man

Behind

This Blog

Manoj jaiswal

is a 56 years old Blogger.He loves to write about Blogging Tips, Designing & Blogger Tutorials,Templates and SEO.

Read More.

DMCA.com |Template Style by manojjaiswalpbt | Design by Manoj jaiswal | ultapulta © . All Rights Reserved |