हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
मैं ने "परिवर्तन" के बदले "हेरफेर" शब्द का प्रयोग किया इसी से आप को समझ में आ जाना चाहिये कि यह सामान्य व्यंग से भी कुछ अधिक था जिसे अंग्रेजी में irony कहा जाता है.
मैं ने ऐसा इसलिये लिखा क्योंकि कई बार लगा कि अक्षर बहुत बडे हैं. रो रो के अक्षर छोटे हुए, आनंद आने लगा, तभी एक दिन आप सब कुछ "हेरफेर" कर देते हैं. यह क्या हाथियों के पढने के लिये बनाया गया है जो आप को बडे अक्षरों से इतना लगाव है.
अब की बार सोचा कि मैं एक व्यंगबाण चला दू. सच, कई बार व्यग करने पर असर होता है.
अब जनाब जरा asthetics का ख्याल रख कर अक्षर आदमी-लायक बना दे. जिनको नहीं दिखता उनके लिये आप कुछ और जरिया निकाल दे.
इन बडे अक्षरों के कारण और भी कई परेशानियां है. ऐसा लगता है कि पन्ना हमारे चेहरे से टकरा रहा हो.
अच्छा आज देखा तो "झलक" का पता ही नहीं है. लगता है "हेरफेर" के बीच आप लोग जनोपयोगी चीजें या तो इधर उधर खिसका देते हैं या "बडी" चीजों को देखने के पीछे "छोटी" लेकिन जनोपयोगी चीजे आप लोग नजरअंदाज कर जाते हैं.
संजय ने मेरे इस उत्तर से पहले एक वाक्य में जो कहा है उसे भी देखें.
कृपया चिट्ठाजगत को जनोपयोगी बनाये एवं अनावश्य्क "हेरफेर" से बचें -- शास्त्री जे सी फिलिप
हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
मनोज जैसवाल
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