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इंडिया को खलेगी प्रवीण की कमीः धोनी

 मनोज जैसवाल=
बेंगलुरु। भारतीय कप्तान महेन्द्र सिह धोनी का कहना है कि टीम को 19 फरवरी से शुरू हो रहे विश्वकप में मध्यम तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की कमी खलेगी जो कोहनी की चोट के कारण इस मेगा टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं। धोनी ने प्री-टूर्नामेंट प्रेस कांफेंस में कहा कि प्रवीण का नहीं खेल पाना हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। वनडे मैचों में उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। वह एक चतुर क्रिकेटर हैं जिन्हें टीम विश्वकप में मिस करेगी। प्रवीण को दक्षिण अफ्रीका दौरे पर कोहनी में चोट लगी थी और वह सोमवार को विश्वकप टीम से बाहर हो गए। उनकी जगह केरल के तेज गेंदबाज शांतकुमारन श्रीसंत को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। गेंद को स्विग कराने में माहिर प्रवीण भारतीय पिचों पर काफी उपयोगी साबित हो सकते थे। यही वजह थी कि उन्हें अन्य गेंदबाजों पर तरजीह देते हुए टीम में शामिल किया गया था।
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क्रिकेट की हर विधा के बादशाह सचिन

जीनियस का जादू
 जीनियस का जादू

125 मैदानों पर 95 शतक और 150 के आसपास अर्धशतक जमाने वाले सचिन तेंदुलकर आज बिना विवाद दुनिया के सबसे बेहतरीन क्रिकेटर हैं. दो दशकों से मैदान पर राज कर रहे तेंदुलकर औसतन हर आठवें वनडे मुकाबले में मैच ऑफ द मैच चुने जाते हैं.


टेस्ट में भी ऐसे कई मौके हैं जब मास्टर ब्लास्टर ने पांच दिन के खेल को सिर्फ तेंदुलकर का खेल साबित कर दिया. आख़िर इतना चमकदार कैसे है जीनियस बल्लेबाज़ का 21 साल टेस्ट और वनडे क्रिकेट का सफर. कई शतकों और रनों के अंबार वाले एक महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर दरअसल आज भी उम्मीदों और विपक्षी टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती का दूसरा नाम हैं.
उनका प्रदर्शन इस बात की बख़ूबी गवाही देता है कि 21 साल से मैदान पर डटे तेंदुलकर ने कैसे वेस्ट इंडीज़ के खूंखार तेज़ गेंदबाज़ों कोर्टली वाल्श, कोर्टली एंब्रोस से लेकर वसीम अकरम, ग्लेन मैक्ग्रा और वकार यूनुस जैसे अचूक माने जाने वाले बॉलरों का डटकर सामना किया है. :
ये सचिन ही हैं जो टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले श्रीलंकाई गेंदबाज़ मुरलीधरन के सामने खड़े होकर शतक पर शतक ठोंक चुके हैं. महान स्पिनरों में चोटी पर गिने जाने वाले ऑस्ट्रेलियाई जादूगर शेन वॉर्न तो उनके डरावने सपने भी देख चुके हैं. वो लगातार दो बार क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मुकाबले वर्ल्ड कप में सबसे ज़्यादा रन ठोंक चुके हैं.
वनडे हो या टेस्ट, विपक्षी टीम के सबसे असरदार गेंदबाज़ को ठंडा करने का काम तेंदुलकर ही करते हैं. हाल के सालों में भी चाहे वो शोएब अख़्तर हों या ब्रेट ली या फिर मलिंगा तेंदुलकर इन्हें बताते हैं कि सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ी क्या होती है.
लेकिन सचिन का ये सफर किसी ख़रे सोने की कहानी से कम नहीं. 15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के दौरे पर गए सचिन तेंदुलकर उस वक्त महज़ 16 साल के थे. तब उनके और टीम इंडिया के सामने इमरान खान, वसीम अकरम और वकार यूनुस जैसे खिलाड़ी थे. शुरुआती मैचों में जब सचिन बल्लेबाज़ी करने गए तो पाकिस्तानी टीम ने उन्हें बच्चा बच्चा कह कर चिढ़ाने की कोशिश भी की.
इसी दौरे में सियालकोट टेस्ट की दूसरी पारी में टीम के चार विकेट 38 रन पर गिर चुके थे. तब मैदान पर सचिन आए लेकिन थोड़ी ही देर बाद वकार यूनुस की गेंद हेलमेट के भीतर घुसती हुई उनकी नाक से जा टकराई. सचिन क्रीज़ पर ही गिर गए, नाक से खून बहने लगा. दूसरे छोर पर बल्लेबाज़ी कर रहे रवि शास्त्री ने डॉक्टर को बुलाने का इशारा किया लेकिन तभी घायल शेर उठ खड़ा हुआ. सचिन ने खून पोंछा और लाल हो चुकी शर्ट बदले बिना ही बल्लेबाज़ी शुरू कर दी. उनकी 57 रन की पारी की बदौलत टीम इंडिया ने टेस्ट ड्रॉ करवा लिया. लेकिन तब 16 साल के लड़के की इस हिम्मत को देखकर कई क्रिकेटरों ने उसी वक्त कह दिया कि 'ये लड़का राज करेगा.'
इसके बाद धीरे धीरे भारतीय क्रिकेट के साधारण और मास्टर ब्लास्टर के असाधारण प्रदर्शन का दौर आया. वनडे में वो सलामी बल्लेबाज़ी करने लगे और दुनिया को बता दिया तेंदुलकर क्या चीज़ है. चलते फिरते सड़कों पर लोग एक साथ तेंदुलकर और टीम इंडिया का स्कोर पूछते थे. दस कदम चलने के बाद फिर तेंदुलकर का स्कोर इस उम्मीद में पूछा जाता था कि सेंचुरी हुई या नहीं. शतक होते ही हर किसी बांछें खिल जाती, मायूसी होने पर हर कोई बस मलाल करता रह जाता.
इस दौरान बाज़ारों, गली मुहल्लों और पनवाड़ियों की दुकान में भी लोग सिर्फ सचिन के भरोसे कमेंट्री सुनकर टीम की जीत के रास्ते तलाशते रहे. करीब करीब 1998 तक टीम और क्रिकेट प्रेमियों की हालत यह रही कि सचिन हैं तो सब है. इस दौरान उनके आउट होते ही टेलीविजन और रेडियो 'अब तो गई टीम' वाले अंदाज़ में बंद हो जाते थे.
उनकी तारीफ़ में जिसने जो भी कहा वो एक समय बाद छोटी बात लगने लगती है. ये मास्टर ब्लास्टर का ही कमाल है कि अब भी वो क्रिकेट के हर किताबी शॉट की तरह उन्होंने हर टीम के खिलाफ़ शतक जड़ते जा रहे हैं. सचिन जब से मैदान पर हैं तब से क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई टीम का सिक्का चल रहा है लेकिन ये जीनियस बल्लेबाज़ का ही जादू है कि उनका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया के ही ख़िलाफ़ रहा है.
चाहे वो हाल में बनाए 200 रन हों या शारजाह या पर्थ में खेली गई पारियां. पचास ओवर के खेल में वो 45 शतक और 91 अर्धशतक जमा चुके हैं. इनमें से कई ऐसी पारियां हैं जिन्हें भूल पाना क्रिकेट प्रेमियों के लिए मुमकिन नहीं. तेंदुलकर अब तक देश दुनिया के 125 मैदानों पर खेल चुके हैं और वनडे में 60 बार और टेस्ट में 11 बार अकेले मैच का आकर्षण चुराने वाले खिलाड़ी, यानी मैन ऑफ द मैच चुने गए हैं.
ऑस्ट्रेलिया,पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी ताकतवर टीमों के ख़िलाफ़ वे अब तक 21 वनडे शतक जमा चुके हैं. वनडे में उनके 46 और टेस्ट में 49 शतक बताते हैं कि कोई विस्फोटक बल्लेबाज़ कितने भरोसे और धैर्य के साथ भी खेल सकता है. पूर्व महान बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर उनके बारे में कहते हैं कि. ''सचिन बताते हैं कि कोई बल्लेबाज़ एक ही वक्त में कितना क्लासिकल और आक्रमक हो सकता है.''
उनके मैदान पर जाते है कि दर्शक और कमेंटेटर भी जोश में आ जाते हैं. पहले कटाक की आवाज़ आती है फिर दर्शकों के शोर के बीच ग्लोरियस, आउटस्टैंडिंग, बेहतरीन या अविश्वसनीय शॉट जैसे कमेंट्री के जुमले सुनाई पड़ते हैं. ये बात भी खेलप्रेमियों से छुपी नहीं है कि अपने लंबे क्रिकेट करियर के दौरान तेंदुलकर कई बार अंपायर के ग़लत फ़ैसले का शिकार हुए लेकिन उन्होंने हमेशा खेल की गरिमा को बनाए रखते हुए अंपायरों के फ़ैसलों पर कभी सवाल नहीं उठाए.
क्रिकेट पर चर्चा करने वाले 21 साल बाद आज भी ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि नाटा सा दिखने वाला बल्लेबाज़ आख़िर इतना शानदार कैसे हैं. दो दशकों के इस दौर में उनकी तुलना ब्रायन लारा से भी हुई और हवा बनकर उड़ गई. मास्टर ब्लास्टर के व्यक्तित्व का एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि वो वक्त के साथ अपने बड़े से बड़े आलोचकों को भी अपना सबसे बड़ा प्रशसंक बनाते चले जाते हैं.
वनडे और टेस्ट में वो सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. कोई दूसरा उनके आस पास भी नहीं. क्रिकेट प्रेमियों को ये उम्मीद भी है कि 95 शतक बना चुके सचिन अभी शतकों के शतक के अलावा भी कई न तोड़े जा सकने वाले रिकॉर्ड भी बनाएंगे.
लेकिन 37 साल की उम्र में एक दिन में क़रीब नौ घंटे मैदान पर दौड़-भाग करना आसान नहीं. शरीर साथ नहीं देता, थकान हावी होने लगती है, दिमाग भी जवानी जैसी सक्रियता से प्रतिक्रिया नहीं करता. लेकिन इन चुनौतियों के खिलाफ़ भी चौके छक्के लगा रहे सचिन कहते हैं कि वो ऐसा कम से कम 39 साल तक करते रहेंगे. उनकी आंखों में भारत के लिए वर्ल्ड कप जीतने का सपना और दिल में इसके लिए मलाल भी है. वो जानते है कि उन्होंने मैदान पर अब तक जो चाहा है वो हासिल किया ऐसे में टीम उनका साथ दे तो क्रिकेट के दुनिया के इस सबसे चमकीले सितारे को मैदान से एक हक़दार विदाई मिलेगी.प्रकाशित मनोज जैसवाल.
manojjaiswakpbt@gmail.com
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क्रिकेट से कॉमनवेल्थ तक भारत का परचम

क्रिकेट से कॉमनवेल्थ तक भारत का परचम(मनोज जैसवाल )

(महोली में ख़ुशी)
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों से लेकर क्रिकेट तक विजय का परचम फहरा दिया है। एक ओर राष्ट्रमंडल खेलों में अपना स्वर्णिम अभियान शुरू करते हुए भारत ने आज 4 स्वर्ण और 2 रजत पदक अपने नाम किये। भारत ने निशानेबाजी के बाद आज कुश्ती में भी दो स्पर्ण पद हासिल कर लिए हैं। इस तरह आज कुल स्वर्ण पदकों की संख्या चार हो गई है। वहीं टीम इंडिया ने मोहाली टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को बेहद रोमांचक तरीके से एक विकेट से परास्त कर दिया। मैच के हीरो वीवीएस लक्ष्मण 73 रन बनाकर नाबाद रहे। 216 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने 9 विकेट पर जरूरी रन बना लिए और सीरीज में 1-0 से बढ़त हासिल कर ली।

लक्ष्मण का शानदार साथ देने वाले ईशांत शर्मा 31 रन बनाकर आउट हुए। सचिन तेंदुलकर ने शानदार 38 रन बनाए। सचिन के आउट हो जाने के बाद टीम इंडिया ने जल्दी-जल्दी जहीर खान, कप्तान एमएस धोनी का विकेट भी गंवा दिया। अब भारत की जीत का जिम्मा लक्ष्मण के साथ ईशांत ने संभाला। जीत के लिए 216 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में पांचवें दिन लंच तक आठ विकेट पर 162 रन बनाए थे। उस दौरान किसी को नहीं लग रहा था कि मैच भारत के पाले में जा भी पाएगा। आस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 428 रन बनाये और दूसरी पारी में 192 बनाये थे। भारत अपनी पहली पारी 405 रन बनाकर आउट हो गई थी।

भारतीय टीम को बधाईयों का तांता
अपने चिर प्रतिद्वंदी ऑस्ट्रेलिया के साथ मोहाली के पीसीए स्टेडियम में चल रहे पहले टेस्ट मैच के बेहद रोमांचक मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम को आज मिली शानदार जीत के बाद चारों तरफ से बधाईयों का तांता लग गया। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा, ‘भारत ने आस्टे्रेलिया के खिलाफ पहला टेस्ट मैच जीत लिया। मुझे भारतीय होने पर गर्व है। भारत मोहाली में टेस्ट क्रिकेट अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में दिखा। श्रीसंत ने कहा कि वेरी वेरी स्पेशल लक्ष्मण ने इस जीत में महान भूमिका निभाई। ईशात शर्मा ने साहसपूर्ण खेल दिखाया। दसवें नंबर पर प्रज्ञान ओझा ने बहुत अच्छी बल्लेबाजी की और जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि इस पूरी जीत में जहीर भाई ने बहुत योगदान दिया। भज्जी पा ने हमेशा की तरह अच्छा खेल दिखाया और जीत दिलाई। सचिन ने टेस्ट मैच में अब तक सबसे अच्छा खेल दिखाया।

बेहद शानदार विजय : सानिया मिर्जा
भारतीय टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा ने कहा, ‘क्या शानदार क्रिकेट मैच था। मैच के दौरान मैंने कई बार दिल का दौरा महसूस किया। यह बेहद शानदार विजय है। आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज डेमियन मार्टिन ने ट्वीट किया, ‘क्या बेहतरीन टेस्ट मैच था। इतना कांटे का मैच ? भारत ने शानदार जीत हासिल की। मैच के अंत में लक्ष्मण ने कितना बढ़िया खेल दिखाया। वह हमारे खिलाफ खेलना पसंद करते हैं। भारत के स्टार टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने कहा, ‘भारतीय क्रिकेट टीम ने क्या बढ़िया जीत हासिल की है। पूरी टीम को मेरी तरफ से बधाई।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में रहे लक्ष्मण के चर्चेक्रिकेट का जादू वाकई सिर चढ़कर बोलता है और जब बात आस्ट्रेलिया और भारत के बीच टेस्ट श्रृंखला की हो तो कहने ही क्या। इसकी बानगी आज राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान भी देखने को मिली जब कवरेज के लिये आये आस्ट्रेलियाई पत्रकारों की नजरें इंटरनेट पर भारत-आस्ट्रेलिया टेस्ट पर टिकी थी। गेंद दर गेंद की जानकारी ले रहे आस्ट्रेलियाई अपनी टीम की जीत की दुआ करने के साथ वीवीएस लक्ष्मण की भी तारीफ कर रहे थे। चोट के बावजूद खेलते हुए लक्ष्मण ने भारत को जीत की दहलीज तक पहुंचाया। स्टीव वा की टीम के खिलाफ ही कोलकाता टेस्ट में 281 रन की पारी खेलने वाले लक्ष्मण को आस्ट्रेलियाई मीडिया ने ही वेरी वेरी स्पेशल की संज्ञा दी थी। सिडनी से आये फेयरफाक्स रेडिया के पत्रकार ओल्ड्स मूरे ने कहा,‘लक्ष्मण वाकई स्पेशल है। हमे लगा था कि यह मैच हम जीत जायेंगे लेकिन एक बार फिर लक्ष्मण आड़े आ गया। वह करिश्माई खिलाड़ी है।’
मजेदार दुनियां के लिय मनोज जैसवाल ईमेल  manojjaiswalpbt@gmail.com
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