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ऐश्वर्या राय: मॉडल से मां बनने तक का सफर

मनोज जैसवाल : पूर्व विश्व सुंदरी और बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय के मॉडल से मां बनने तक का सफर बहुत लम्बा है.
वर्ष 1994 में विश्व सुंदरी का खिताब जीतने के बाद ऐश्वर्या ने बॉलीवुड में कदम रखा और जल्दी ही वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सफल अभिनेत्री के रूप में विख्यात हो गईं. ऐश्वर्या अब मां बनने वाली हैं.
ऐश्वर्या पहली बार वर्ष 1993 में अभिनेता आमिर खान और महिमा चौधरी के साथ कोका कोला के विज्ञापन में नजर आई थीं. इसके बाद ऐश्वर्या ने उसके अगले ही वर्ष ‘मिस इंडिया' कॉन्टेस्ट में अपनी किस्मत आजमाईं और वह ‘मिस इंडिया वर्ल्ड' का खिताब जीतने में सफल रहीं.
लोरियल और लॉनगिन्स जैसे अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडो का ब्रांड एम्बेसडर बनने से लेकर ग्लैमर जगत तक ऐश्वर्या को शोहरत हासिल है.
वर्ष 2006 में एक पत्रिका ने ऐश्वर्या को सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में शामिल किया. इसके बाद टाइम पत्रिका ने वर्ष 2004 और 2010 में विश्व के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में ऐश्वर्या को शामिल किया था.
इसके बाद ऐश्वर्या ने ‘ब्राइड एंड प्रीज्यूडिस' और ‘पिंक पैंथर-2' जैसी फिल्मों में काम कर खूब सुर्खियां बटोरी.
दिल्ली के फैशन डिजाइनर कुणाल कपूर का कहना है कि ऐश्वर्या में देसी और पश्चिमी देशों की रूप-रंग की खूबियों का बेहतरीन मिश्रण है.
कुणाल ने कहा, ऐश्वर्या स्टाइल आईकन हैं. उनका करिश्मा मॉडलिंग से लेकर फिल्मजगत में बरकरार है. उनमें देसी और पश्चिमी देशों की खूबियों का बेहतरीन मिश्रण है जो उन्हें विश्व की खूबसूरत महिला बनाता है.
ऐश्वर्या को ‘हम दिल दे चुके सनम' में बेहतरीन भूमिका देने वाले निर्देशक संजय लीला भंसाली ने कहा, वह न केवल खूबसूरत हैं बल्कि एक चतुर और तेज दिमाग वाली महिला हैं.
भंसाली ने कहा, इसके लगभग एक साल बाद कांस फिल्म महोत्सव में ऐश्वर्या के जूरी सदस्य बनने, अन्य फिल्म महोत्सवों में शामिल होने और अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों व निर्देशकों से हुई उनकी मुलाकात ने उन्हें एक खास व्यक्ति बना दिया.
ऐश्वर्या के फिल्मी सफर की शुरुआत मणिरत्नम की तमिल फिल्म ‘इरुवार' से हुई. तमिल फिल्म करने के बाद उसी वर्ष ऐश्वर्या को निदेशक राहुल रावल की निर्देशन में बनी फिल्म ‘और प्यार हो गया' के द्वारा बॉलीवुड में एंट्री मिली.
वर्ष 2007 में अभिनेता अभिषेक बच्चन से सगाई की घोषणा करने वाली ऐश्वर्या ने उसी वर्ष 20 अप्रैल को उनसे शादी कर ली. ऐश्वर्या को वर्ष 2009 में पदम श्री से सम्मानित किया गया.



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यह है मायाराज:मनोज जैसवाल

बलात्‍कार के प्रयास में बीएसपी विधायक के 3 गुर्गे गिरफ्तार

मनोज जैसवाल : मुजफ्फरगनर। देहरादून से लौट रही दिल्ली की 2 लड़कियों से मुजफ्फरनगर में रेप करने की कोशिश करने वाले बसपा विधायक के 3 गुर्गों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों लड़कियों ने दिल्‍ली आकर गीता कालोनी पुलिस को इसकी सूचना दी थी। पहले पुलिस ने इन लड़कियों पर दबाव बनाकर समझौता कराने की कोशिश की थी।पुलिस ने इन तीनों आरोपियों की‍ गिरफ्तारी के लिए विधायक शाहनवाज राणा के घर छापा भी मारा था। पकड़े गए तीनों आरोपियों में से एक दिलशान राणा विधायक का काफी खास बताया जा रहा है। दिलशान राणा को ही मामले का मुख्‍य आरोपी बताया जा रहा है। उसके पास से पुलिस ने लाइसेंसी रिवॉल्‍वर भी जब्‍त की है।गीता कालोनी की दो लड़कियां दो लड़कों के संग देहरादून से लौट रही थीं। मंगलवार रात जब ये लोग मुजफ्फरनगर पहुंचे तभी इन तीनों ने इन लोगों पर हमला बोल दिया। वे लड़कियों को फारचूनर गाड़ी में बिठाकर ले गए और रेप करने की कोशिश की लगे। उनके साथ के लड़कों ने दिल्‍ली पुलिस को घटना की जानकारी दी।
पुलिस ने तुरंत मुजफ्फरनगर सिविल लाइन थाना पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर लड़कियों को इन विधायक के गुर्गों के हाथ से छुड़वाया। पुलिस ने आरोपियों की गाड़ी भी अपने कब्‍जे में ले ली है। इस घटना के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि उत्‍तर प्रदेश में बसपा सरकार के अपने लोग ही हत्‍या और बलात्‍कार के मामलों में शामिल हैं।
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क्या गोपीनाथ मुंडे की बीजेपी को कोई जरूरत नहीं है?

मनोज जैसवाल : नई दिल्ली। क्या गोपीनाथ मुंडे की बीजेपी को कोई जरूरत नहीं है? आखिर क्यों महीनों तक ये चेहरा राजनीति से दूर रहा और जब अचानक सामने आया तो बागी हो गया। बीजेपी के बागी हुए इस नए चेहरे ने पार्टी में तूफान खड़ा कर दिया है। बीजेपी में किसी कद्दावर क्षत्रप का अचानक बागी हो जाना कोई नई बात नहीं है। कल्याण सिंह, उमा भारती, बाबू लाल मरांडी, गोविंदाचार्य जैसे कई नेता गोपीनाथ मुंडे की राह पर चले और पार्टी से कुट्टी कर बैठे। आम चुनावों में बीजेपी को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी।

गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के कद्दावर ओबीसी नेता हैं। महाराष्ट्र में पार्टी को खड़ा करने वालों में उनका नाम लिया जाता है। अन्य पिछड़े वर्ग से आने वाले मुंडे को इसी वजह से बीजेपी-शिवसेना की सरकार में उपमुख्यमंत्री भी बनाया गया था। लेकिन अब मुंडे के लिए हालात दुश्वार हो गए हैं। वो सरेआम कह रहे हैं कि पार्टी में लोकतंत्र नहीं बचा है। कुछ लोग किचन कैबिनेट की तरह फैसला ले लेते हैं। कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही है।
दरअसल मुंडे की बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गडकरी से कतई नहीं पटती है। महाराष्ट्र में गडकरी को अगड़ों के नेता के तौर पर जाना जाता है। अगड़ों और पिछड़ों की ये लड़ाई बीजेपी में नई नहीं है। पिछड़े वर्ग से ही आने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी पार्टी ने बड़े ही नाशुक्राना अंदाज में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उस वक्त प्रदेश बीजेपी की कमान राजनाथ सिंह संभाल रहे थे।

ऐसे ही जब मध्य प्रदेश में पिछड़ी लोधी कैटेगरी से आने वाली उमा भारती की लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी तो पार्टी ने पहले तो उनके पर कतरे लेकिन उनके ना मानने पर उनको भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लंबे वनवास के बाद हाल में पार्टी में उनकी वापसी हुई। उसी तरह रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान यूपी के ही कद्दावर नेता साक्षी महाराज को भी पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। ये फेहरिश्त और लंबी है जिसमें गंगाचरण राजपूत से लेकर बाबू लाल मरांडी तक का नाम है।

अगड़ी जाति से आने वाले गोविंदाचार्य ने भी जब पार्टी में सोशल इंजीनियरिंग की पैरवी कर पिछड़ों को आगे लाने की हिमायत की थी तो उनको भी पार्टी ने किसी ना किसी बहाने से अपने से दूर भेज दिया। यही हाल गुजरात के नेता शंकर सिंह बाघेला के साथ हुआ और आज वो कहां हैं, ये सबको पता है। बीजेपी ने सत्ता हासिल करने के लिए अपने कई विवादास्पद मुद्दे ठंडे बस्ते में डाल दिए थे लेकिन पार्टी को सभी वर्गों के बीच लोकप्रिय बनाने की कोई बड़ी कवायद नहीं की। ओबीसी और जनाधार वाले नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना बीजेपी को महंगा पड़ सकता है।
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शराब पर पाबंदी : कोर्ट जाएंगे इमरान

मनोज जैसवाल  : मुंबई। महाराष्ट्र में शराब पीने के लिए न्यूनतम आयु सीमा को 21 से बढ़ाकर 25 वर्ष करने के फैसले के खिलाफ बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान न्यायालय का रुख करेंगे। वे सरकार के फैसले को न्यायालय में जनहित याचिका के जरिए चुनौती देंगे।

इमरान ने प्रेसवार्ता में कहा कि शराब पीने की न्यूनतम आयुसीमा को बढ़ाने का फैसला तार्किक नहीं है। यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का हनन है। हालांकि इमरान पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि उनका इस तरह अचानक सामने आ जाना उनकी फिल्म ‘देहली बेली’ का पब्लिसिटी स्टंट है।

लेकिन वे कहते हैं कि इसका उनकी फिल्म के प्रमोशन से कोई संबंध नहीं है। फिल्म प्रमोशन का मामला अलग चल रहा है और उसमें इस तरह के कदम की जरूरत नहीं है।

इमरान ने कहा कि मैं दोहरी मानसिकता का विरोध कर रहा हूं। यदि कोई व्यक्ति वयस्क है, तो उसे वयस्कों से जुड़े सभी अधिकार मिलने चाहिए। अगर न्यायालय को लगेगा कि मैं गलत हूं तो मैं अपने कदम वापस खींच लूंगा।

इमरान ने कहा कि आज हर कोई शिकायत कर रहा है कि देश में सबकुछ गलत हो रहा है। अब समय आ गया है कि लोग खड़े हों और चीजों को ठीक करें। मैं राज्य और देश के लोगों का सहयोग करना चाहता हूं।
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ख़ुद को नर तितली की नज़र से बचाने का उनका तरीक़ा बड़ा अनोखा है .

 मनोज जैसवाल : शोधकर्ताओं का कहना है कि तितलियां सेक्स को नज़रअंदाज़ करने के लिए अपने पंखों का सहारा लेती हैं.

ख़ुद को नर तितली की नज़र से बचाने का उनका तरीक़ा बड़ा अनोखा है .

इसके लिए मादा तितली अपने रंग बिरंगे चमकदार पंखों को सिकोड़ लेती है यानि उन्हें बंद कर लेती हैं

शोधकर्ताओं के ये नतीजे ईथोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुए हैं.

मादा तितलियां उस समय अक्सर अपने पंखों को बंद कर लेती हैं जब दूसरी तितलियों का झुंड उनके आस पास से गुज़रता है. ये तितलियां ऐसा एक रणनीति के तहत करती हैं ताकि वो नर तितलियों के शोषण से ख़ुद को बचा सकें.

युन या इडे,शोधकर्ता ,कुरूम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी

फ़ुकुडु स्थित कुरूम इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नालॉजी के प्रमुख शोधकर्ता युन या इडे ने शोध के दौरान ये पाया कि ये मादा तितलियां उस समय अक्सर अपने पंखों को बंद कर लेती हैं जब दूसरी तितलियों का झुंड उनके आस पास से गुज़रता है.

युन या इडे का ये भी कहना था कि ये मादा तितलियां ऐसा एक रणनीति के तहत करती हैं और ऐसा वो इसलिए करती है ताकि वो नर तितलियों के शोषण से ख़ुद को बचा सकें.

शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग के लिए नर तितली के एक मॉडल का इस्तेमाल किया और इसके बाद मादा तितलियों की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया.

शोधकर्ता तितली के मॉडल को जब तितलियों के पास ले गए तो उन्होनें पाया कि मादा तितलियों ने अपने पंख बंद कर लिए.

दूसरी ओर ऐसी तितलियां जो कुँवारी थी, जिन्हें सहयोगी की तलाश थी, उन्होंने अपने पंखों को बंद नही किया. इसका मतलब ये है कि वो सेक्स की इच्छुक थीं.

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कितना काला धन, पता लगाएगी सरकार


मनोज जैसवाल : काले धन का पता लगाने के लिए बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने रविवार को घोषणा की कि वह देश-विदेश में जमा काले धन के आकलन और इससे जुड़े अन्य पहलुओं का अध्ययन करा रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा शुरू कराया गया काम 16 माह में पूरा किया जाएगा। देश के तीन शीर्ष संस्थान इस काम को अंजाम दे रहे हैं। ये संस्थान यह भी बताएंगे कि मनी लांड्रिंग के लिए क्या तरीके अपनाए जाते हैं, काले धन की वजह क्या है और किन-किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा काली कमाई की जा रही है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस तरह का कोई पुख्ता अनुमान उपलब्ध नहीं है कि देश और देश के बाहर कितना काला धन है। अध्ययन में यह भी बताया जाएगा कि किस तरह काले धन को पकड़ा जाए और उस पर अंकुश लगाते हुए उसे किस तरह टैक्स के दायरे में लाया जाए। नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकानॉमिक रिसर्च (एनसीईएआर), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पालिसी (एनआईपीएफपी)और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (एनआईएफएम) द्वारा मार्च से यह अध्ययन किया जा रहा है।

काले धन पर सबसे पहला अध्ययन करीब 26 साल पहले 1985 में एनआईपीएफपी ने किया था। मंत्रालय ने कहा कि यह अनुमान विश्वसनीय नहीं है कि काले धन का आंकड़ा 462 अरब डॉलर से 1400 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है। काला धन मामले में सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाई है, जो ऐसे धन को जब्त करने उसे राष्ट्रीय संपदा घोषित करने का का कानूनी ढांचा सुझाएगी। समिति में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष भी शामिल होंगे। गौरतलब है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कुछ समय पूर्व कहा था कि सरकार काले धन से निपटने और विदेशों में जमा धन का पता लगाने के लिए पांच स्तरीय योजना पर काम कर रही है। इसके तहत विदेशों के साथ बैंकिंग सौदों और कर संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए नए और संशोधित समझौते करने के साथ घरेलू कानूनों में सुधार भी शामिल हैं।

आमरण अनशन कर सरकार को घेरेंगे बाबा रामदेव
योग गुरु स्वामी रामदेव ने 4 जून से यहां शुरू होने वाले अष्टांग योग शिविर और सत्याग्रह के जरिये सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। इस सत्याग्रह से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से देशभर के करीब दस करोड़ लोगों के जुड़ने की संभावना है। रामदेव ने काले धन और भ्रष्टाचार को भी मुद्दा बनाया है।

भारतीय स्वाभिमान ट्रस्ट के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने रामलीला मैदान में शिविर के लिए की जा रही तैयारियों को लेकर बताया कि अभी तक 38 लाख 74 हजार लोगों ने एसएमएस के जरिये स्वामी रामदेव के नेतृत्व वाले सत्याग्रह अभियान और आमरण अनशन का समर्थन किया है। रामलीला मैदान और जंतर-मंतर के अलावा विभिन्न प्रदेशों की राजधानियों और जिला मुख्यालयों में भी समानांतर सत्याग्रह अभियान चलेगा। कुल मिलाकर दस करोड़ लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इस अभियान से जुडें़गे। आचार्य बालकृष्ण ने स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में अष्टांग योग शिविर चार से 12 जून तक चलेगा, लेकिन जंतर-मंतर पर सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार स्वामी रामदेव की मांगों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती।

-मनी लांड्रिंग के लिए क्या तरीके अपनाए जाते हैं
-किन क्षेत्रों में है सबसे ज्यादा काला धन
-काले धन को किस तरह कर के दायरे में लाया जाए
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1400
अरब डॉलर तक काले धन का अनुमान। वैसे सरकार इस आंकड़े को विश्वसनीय नहीं मान रही
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कौन कर रहा अध्ययन
एनसीईएआर, एनआईपीएफपी और एनआईएफएम

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अब सात दिन में मिलेगा ATM में फंसा पैसा

मनोज जैसवाल : बैंकों के एटीएम में पैसा फंसने से परेशान लोगों को जल्द इस समस्या से निजात मिलने वाली है। रिजर्व बैंक ने एटीएम में फंसी राशि को सात दिन में लौटाने का निर्देश देते हुए बैंकों से कहा है कि ऐसा नहीं होने पर उन्हें ग्राहक को 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति (कॉम्पनशेसन) राशि देनी होगी। रिजर्व बैंक का यह नया निर्देश एक जुलाई 2011 से लागू होगा।

बैंकों के एटीएम से कई बार पैसा निकलता नहीं है पर ग्राहक के खाते से राशि कट जाती है। ऐसे में ग्राहकों को काफी परेशानी होती है। उन्हें बैंकों के चक्कर काटने पड़ते हैं। पर अब उनको इस परेशानी से निजात मिलने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक के नए निर्देश से ऐसे ग्राहकों की समस्या दूर हो सकती है।

केंद्रीय बैंक की अधिसूचना में कहा गया है कि ग्राहक की शिकायत मिलने के दिन से पैसा लौटाने की समयसीमा को 12 कार्यदिवस (वर्किंग डे) से घटाकर सात वर्किंग डे कर दिया गया है। यदि बैंक सात वर्किंग डेज में ग्राहक के खाते में पैसा डालने में विफल रहते हैं, तो उन्हें उपभोक्ता को प्रतिदिन के हिसाब से 100 रुपए का मुआवजा देना होगा।

अभी तक बैंकों को विफल एटीएम लेनदेन में ग्राहक के पैसे को उसके खाते में दोबारा डालने के लिए 12 दिन का समय मिलता था। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यदि ग्राहक जारीकर्ता बैंक के पास 30 दिन के भीतर शिकायत कर देता है तो सात दिन में उसे फंसी राशि नहीं मिलने पर बैंक को प्रतिदिन 100 रुपए का मुआवजा देना होगा। हालांकि, ग्राहक को इस तरह की परेशानी होने के 30 दिन के भीतर शिकायत करनी होगी, तभी वह क्षतिपूर्ति पाने का हकदार होगा।

manojjaiswalpbt@gmail.com
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गांधी के राज्य में दूध से ज्यादा सुलभ है शराब

मनोज जैसवाल : गुजरात के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने बृहस्पतिवार को यू टर्न लेते हुए उन पर भ्रष्टाचार को लेकर जोरदार हमला किया।

देश भर में भ्रष्टाचार के खि
लाफ अलख जगा रहे गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुजरात विद्यापीठ में विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों द्वारा आयोजित ‘लोक सुनवाई’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गुजरात में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार देखकर वे काफी निराश हैं। मोदी की तारीफ करने के लिए आलोचनाएं झेल चुके गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार तेजी से फैल रहा है। गांधी के राज्य में इतना भ्रष्टाचार पहले कभी नहीं था।

भ्रष्टाचार के कई मामले
भाजपा के तेजतर्रार नेता पर तंज करते हुए हजारे ने कहा कि गांधी के गुजरात में आज शराब दूध से ज्यादा सहज सुलभ है। यहां आने के बाद मैंने महसूस किया है कि यहां भ्रष्टाचार के कई मामले हैं। उन्होंने मोदी से राज्य में तुरंत लोकायुक्त नियुक्त करने की मांग की।

जन लोकपाल बिल की मसौदा समिति में सिविल सोसायटी के पांच सदस्यों में से एक हजारे ने कहा कि सबसे पहले तो लोगों को मजबूत करने के लिए राज्य में लोकायुक्त लाया जाए और दूसरा ग्राम सभा को और अधिकार देने के लिए कानून बनाए जाएं।

अन्ना के सहयोगी और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने कहा कि ‘लोक सुनवाई’ में गुजरात सरकार के विकास के कई झूठे दावों की पोल खुल गई है। पिछले दिनों हजारे ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मोदी और नीतीश द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से सीख लेनी चाहिए।
manojjaiswalpbt@gmail.com
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गृह मंत्रालय में निकला एक और 'भेदिया'

मनोज जैसवाल : नई दिल्‍ली. गृह मंत्रालय में एक और 'भेदिए' के होने का मामला सामने आया है। यूपी कैडर के सीनियर आईएएस सदाकांत को गृह मंत्रालय से हटाकर वापस उन्‍हें उनके मूल कैडर में यूपी भेज दिया गया है। गृह मंत्रालय में ज्‍वाइंट सेक्रेट्री (बॉर्डर मैनेजमेंट) सदाकांत के खिलाफ निजी कंपनियों को संवेदनशील सूचनाएं मुहैया कराने के आरोप सामने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

एक टीवी चैनल ने सदाकांत को गृह मंत्रालय से बाहर किए जाने और यूपी कैडर वापस भेजे जाने का दावा किया है। चैनल का दावा है कि बीते 20 मार्च को ही सदाकांत के खिलाफ यह कार्रवाई की गई थी। सदाकांत के खिलाफ कैडर वापसी का फरमान जारी होने के तुरंत बाद ही नॉर्थ ब्‍लॉक स्थित उनके दफ्तर से सारा सामान हटा दिया गया। सीबीआई सदाकांत के निजी कंपनियों से रिश्‍तों की पड़ताल कर रही है। 1983 बैच के यूपी कैडर के आईएएस सदाकांत मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी हैं।

गृह सचिव जी के पिल्‍लई ने आज इस बारे में पूछे जाने पर पत्रकारों से कहा, 'सदाकांत को भ्रष्‍टाचार के आरोपों के चलते यूपी कैडर में वापस भेज दिया गया है। सीबीआई उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच कर रही है।'

सदाकांत के खिलाफ भ्रष्‍टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप लगे हैं। आरोप हैं कि सदाकांत ने नेशनल प्रोजेक्‍ट कंस्‍ट्रक्‍शन कॉर्पोरेशन के तहत एक प्रोजेक्‍ट में किसी प्राइवेट कंपनी की मदद कर रहे थे। गृह मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने इस मामले में सदाकांत से पूछताछ के लिए सीबीआई को मंजूरी दे ही है इसलिए उन्‍हें वापस उनके कैडर में भेज दिया गया।

सदाकांत 2007 में पांच साल के लिए केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आए थे और केंद्र में उनका कार्यकाल 2012 तक था लेकिन भ्रष्‍टाचार के आरोप लगने के बाद सीबीआई उनसे पूछताछ करना चाहती है, इसलिए पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सीनियर आईएएस अधिकारी को वापस उनके मूल कैडर में भेजना पड़ा।

इससे पहले गृह मंत्रालय में तैनात दो अधिकारियों को विभिन्‍न आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी रवि इंदर सिंह को संवेदनशील सूचनाएं लीक करने के आरोप में बीते साल संस्‍पेंड कर दिया गया था। गृह मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव के पद पर तैनात ओ रवि को भी घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई की छापेमारी के दौरान ओ रवि के घर से 50 लाख रुपए मिले थे। पाकिस्‍तान के लिए जासूसी करने वाली एक महिला अधिकारी माधुरी गुप्‍ता की गिरफ्तारी भी चौंकाने वाली थी। यह अधिकारी पाकिस्‍तान स्थित भारतीय दूतावास में तैनात थी।

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यूपी में एक और ज़मीन घोटाले का आरोप


भट्टा परसौल(फ़ाईल फ़ोटो)
कुछ ही दिनों पहले ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल में ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई जिसमें चार लोग मारे गए थे.
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार पर दिल्ली से सटे नोएडा में पांच हज़ार करोड़ रूपए के एक और ज़मीन घोटाले का आरोप लगाया है.
भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री किरीट सोमैया ने मंगलवार को लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर आरोप लगाया कि मायावती सरकार ने नोएडा में किसानों की ज़मीनें जनहित के लिए औद्योगिक विकास के नाम पर सस्ते दामों पर जबरन ले लीं और फिर उन्हें अपने चहेते लोगों को फ़ार्म हाउस के नाम पर आबंटित कर दिया.
भारतीय जनता पार्टी ने इसे नोएडा फ़ार्म हाउस घोटाला नाम दिया है.

'फ़ार्म हाउस घोटाला'

किरीट सोमैया के अनुसार मायावती सरकार ने सन् 2009 में गौतमबुद्धनगर में नोएडा योजना के अंतर्गत औद्योगिक विकास के नाम पर दादरी तहसील के दोस्तपुर मंगरौली गाँव में किसानों की 130 हेक्टर ज़मीन का अधिग्रहण किया.
ज़मीन का बाज़ार मूल्य लगभग 15 हज़ार रुपए वर्ग मीटर है जबकि किसानों को केवल 888 रूपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवज़ा दिया गया.
किरीट सोमैया, भाजपा नेता
सरकार ने भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही जनहित के नाम पर तात्कालिक ज़रूरत बताकर कर ली.
सौमैया के अनुसार ज़मीन का बाज़ार मूल्य लगभग 15 हज़ार रुपए वर्ग मीटर है जबकि किसानों को केवल 888 रूपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवज़ा दिया गया.
सोमैया ने आरोप लगाया कि माया सरकार ने कुछ दिन बाद इन ज़मीनों पर बने फ़ार्म हाउस को अज्ञात अस्तित्वहीन कंपनियों को स्थानांतरित कर दिया.
सोमैया ने सवाल किया, ''खेती करने वाले किसानों से ज़मीन छीनकर पैसे वालों को फ़ार्म हाउस के लिए देना कैसा औद्योगिक विकास है?’’
सरकार विरोधी किसान(फ़ाइल फ़ोटो)
भारत में किसान सरकार की ज़मीन अधिग्रहण नीति का विरोध करते रहे हैं.
सोमैया के मुताबिक़ जिन लोगों को ज़मीनें दी गई उनमे लखनऊ निवासी शांति सिंह और तीन निजी कम्पनियाँ मेसर्स सुपीरियर पोर्टफोलियो, मेसर्स ग्रेट वैल्यू बिल्डर्स तथा मेसर्स कुणाल इन्फ्राटेक शामिल हैं.
सोमैया का कहना है कि उन्होंने सूचना अधिकार नियम के तहत आबंटियों की पूरी जानकारी मांगी है.
सोमैया ने पत्रकारों को भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय के एक पत्र की फ़ोटोकापी भी दी, जिससे पता चलता है कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ मनी लांड्रिंग क़ानून के तहत जांच शुरू की है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई सहयोग नही दिया.
भाजपा इस मामले में किसानों को भी संगठित करेगी और संघर्ष के ज़रिए उनकी ज़मीन वापस दिलाएगी.
किरीट सोमैया, भाजपा नेता

जांच

सोमैया ने बताया कि उनकी पार्टी इस घोटाले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से चाहती है. इसके लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की जायेगी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक इन आरोपों का जवाब नही दिया है.
सोमैया ने बताया कि भाजपा इस मामले में किसानों को भी संगठित करेगी और संघर्ष के ज़रिए उनकी ज़मीन वापस दिलाएगी.
भाजपा ने एक महीने के अदंर मायावती सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का यह तीसरा आरोप पत्र जारी किया है.
उत्तर प्रदेश भाजपा ने इससे पहले मायावती सरकार के सौ घोटालों की रिपोर्ट जारी कर दो लाख चौवन हज़ार करोड़ रुपयों की लूट का आरोप लगाया था.
उसके बाद दूसरे आरोप पत्र में सरकारी चीनी मिलें सस्ती दरों पर बेंचने में भी घोटाले का आरोप लगाया था.
मायावती सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.
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ए राजा हैं भ्रष्टाचार के मामले में विश्व में नं-2


मनोज जैसवाल :नई दिल्ली। घोटालों और सत्ता के गलत इस्तेमाल के मामले में पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं। करोड़ों रुपये के घोटाले में फंसे ए राजा सत्ता के गलत इस्तेमाल के मामले में लीबिया के तानाशाह गद्दाफी को पछाड़ चुके हैं। यह कहना है प्रसिद्ध टाइम पत्रिका का।
टाइम के मुताबिक सत्ता का गलत इस्तेमाल करने वाले शीर्ष 10 लोगों में राजा को इसलिए दूसरे नंबर पर रखा गया है, क्योंकि उनकी वजह से सरकारी खजाने को अब तक की सबसे बड़ी चपत लगी है। यह भारत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। इस मामले में पहले नंबर पर हैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, जिन्होंने अपने विरोधियों के खिलाफ सत्ता का गलत इस्तेमाल किया।
गद्दाफी इस बदनाम लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं। छठे नंबर पर है इटली के पीएम सिल्वियो बर्लुस्कोनी और 7वें नंबर पर है उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग इल, जो कि दक्षिण कोरिया से महिलाओं को अगवा कर जबरदस्ती अपने पास रखते हैं। 

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इस शुक्रवार 3 फिल्‍में मचाएंगी बॉक्‍सआफिस पर धमाल

मनोज जैसवाल  :नई दिल्ली। बॉक्सऑफिस पर इस शुक्रवार तीन फिल्में 'कश्मकश', 'प्यार का पंचनामा' और '404' प्रदर्शित होने जा रही हैं। इनमें से किसी में हास्य है तो किसी में रोमांच और कोई फिल्म नाटकीयता से भरी है।

ऋतुपर्णो घोष के निर्देशन में बनी 'कश्मकश' नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी पर आधारित है। प्रोसेनजीत चटर्जी, जिशू सेनगुप्ता, राइमा सेन और रिया सेन ने इसमें अभिनय किया है।

बीसवें दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित 'कश्मकश' कोलकाता में कानून के छात्र रमेश (प्रोसेनजीत) और उसके दोस्त की बहन हेमनलिनी (राइमा सेन) के बीच प्रेम की कहानी है। रमेश के पिता द्वारा अपने बेटे को गांव वापस बुला लेने से फिल्म की कहानी में नया मोड़ आ जाता है।

प्रवाल रमन की '404' मनोवैज्ञानिक रोमांच से भरी फिल्म है। यह एक मेडीकल कॉलेज के विज्ञान में भरोसा करने वाले प्रोफेसर अनिरुद्ध (निशीकांत कामत) और उनके कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच संघर्ष करने वाले छात्र अभिमन्यु (राजवीर अरोड़ा) की कहानी है। फिल्म में प्रख्यात अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बेटे इमाद ने भी अभिनय किया है।

निर्देशक लव रंजन की फिल्म 'प्यार का पंचनामा' रोमांस से भरी फिल्म है। इसमें कार्तिकेय तिवारी, रायो भखिर्ता, दिव्येंदु शर्मा, सोनाली सहगल, नुसरत भरूचा और इशिता शर्मा ने अभिनय किया है। यह तीन दोस्तों रजत, चौधरी और लिक्विड की कहानी है। अपनी उबाऊ नौकरी से तंग आ चुके इन लड़कों को अपनी प्रेमिकाओं की तलाश है।
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आईएसआई प्रमुख पासा दे सकते हैं इस्तीफा


मनोज जैसवाल:आईएसआई प्रमुख पासा दे सकते हैं इस्तीफा


 ISI प्रमुख का इस्तीफा संभव
आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा (फाइल फोटो)
आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.
ऐबटाबाद स्थित एक प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठान के पास ओसामा बिन लादेन के मारे जाने पर पाकिस्तान की हुई व्यापक आलोचना के मद्देनजर आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

एक मीडिया रिपोर्ट में आज इस बात का दावा किया गया है.

न्यूजवीक पत्रिका से जुड़े एक समाचार वेबसाइट ‘द डेली बीस्ट’ ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया है, ‘‘पाशा अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं क्योंकि पाकिस्तान सरकार को अलकायदा सरगना ओसामा को लेकर हुई गड़बड़ियों के लिए एक बलि का बकरा चाहिए.’’

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, ‘‘उनका मानना है कि एक अहम पद पर आसीन व्यक्ति को अपना पद गंवाना होगा और ऐबटाबाद में दुनिया के सर्वाधिक वांछित आतंकवादी की मौजूदगी को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नाराजगी को जल्द ही कम करना होगा.’’

गौरतलब है कि ऐबटाबाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास स्थित है.

अधिकारी ने बताया, ‘‘इस बात की प्रबल संभावना है कि जिस व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जाएगा, वह लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा हैं.’’

पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) तलत मसूद ने कहा कि यह पाशा के व्यक्तिगत और राष्ट्रीय हित में है कि वह इसकी जिम्मेदारी ले.

मसूद के हवाले से बताया गया है, ‘‘अवाम नाराज है. वे इसे सेना की गलती के रूप में देखते हैं, जिसपर उन्होंने बहुत भरोसा किया है.’’

इसबीच, आईएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह इस खबर की पुष्टि नहीं कर सकते हैं और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि पाशा पर इस्तीफा देने के लिए दबाव डाला जा रहा है.

अधिकारी ने बताया, ‘‘यह रूटीन से हटकर है कि कोई व्यक्ति नाकामियों को लेकर इस्तीफा दे. लेकिन किसी तो जाना ही होगा.’’

एक पूर्व आईएसआई अधिकारी ने कहा, ‘‘पाकिस्तानी खुफिया विभाग की यह एक बड़ी नाकामी है और शर्मिंदगी की बात है. पाशा पर इस्तीफा देने के लिए दबाव बढ़ रहा है.’’

मसूद और वरिष्ठ पकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि पाशा का इस्तीफा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सुके विास को दुरूस्त करने की प्रक्रि या में पहला कदम हो सकता है.

मसूद ने कहा, ‘‘यह बहुत ज्यादा दबाव को कम कर सकता है.’’

यह सेना और आईएसआई की बुरी तरह से धूमिल हुई छवि को ठीक कर सकता है.

पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पाशा आईएसआई के शीर्ष पद को लेकर कभी भी इच्छुक नहीं थे क्योंकि खुफिया विभाग की उनकी पृष्ठभूमि नहीं थी. हालांकि वह कयानी के बहुत करीबी थे और उन्होंने वर्ष 2008 में सेना प्रमुख बनने के बाद पाशा को इस पद नियुक्त करने की बात पर जोर डाला था.
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मीडिया में छप सकती है अमर सिंह की बातचीत: SC


प्रेषक : मनोज जैसवाल
  
नई दिल्ली ।। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह को जोर का झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अमर सिंह की टैप की गई बातचीत के मीडिया में प्रसारित या प्रकाशित करने पर लगी रोक हटा दी है। गौरतलब है कि कई नेताओं और बॉलिवुड ऐक्ट्रेस के साथ अमर सिंह की बातचीत टैप की गई थी।

अमर सिंह को थोड़ी सी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह गैरकानूनी तरीके से फोन टैप किए जाने को लेकर टेलिकॉ
म ऑपरेटर के खिलाफ कदम उठा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमर सिंह ने इस मामले में तथ्यों को छुपाया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी 2006 को इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया द्वारा अमर सिंह समेत किसी भी शख्स की बातचीत के टेप की विषयवस्तु को प्रसारित या प्रकाशित करने पर रोक लगा दी थी। बेंच ने 29 मार्च को अमर सिंह और एक गैरसरकारी संगठन सीपीआईएल की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। सीपीआईएल ने अमर सिंह की याचिका का विरोध किया था और उनकी सारी बातचीत को सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की थी।

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लव का द एंड ‍: फिल्म समीक्षा


मनोज जैसवाल 


Luv Ka The End
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बैनर : वाय फिल्म्स
निर्माता : आशीष पाटिल
निर्देशक : बम्पी
संगीत : राम सम्पत
कलाकार : श्रद्धा कपूर, ताहा शाह, शेनाज ट्रेजरीवाला, जन्नत जुबैर रहमानी, अर्चना पूरन सिंह, पश्ती एस.
सेंसर सर्टिफिकेट : यू/ए * 1 घंटा 48 मिनट * 12 रील
रेटिंग : 2.5/5

आमतौर पर हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है कि यदि हीरोइन को उसके प्रेमी ने धोखा दिया है तो वह आँसू बहाती है या नियति मानकर चुपचाप बैठी रहती है, लेकिन ‘लव का द एंड’ की हीरोइन ऐसी नहीं है। वह तुरंत फैसला लेती है अपने प्रेमी से बदला लेने का। उसे सबक सिखाने का।

‘आई विल गेट हिम बाय हिज़ बॉल्स’ जैसे संवाद भी सुनने को मिलते हैं। हीरोइन का यह रूप और अंदाज इस फिल्म को फ्रेश लुक देता है, लेकिन यही सब एक अच्छी फिल्म के लिए काफी नहीं है। फिल्म के स्क्रीनप्ले में गड़बड़ी है और इस वजह से फिल्म भरपूर मजा नहीं दे पाती क्योंकि बीच-बीच में रफ पैचेस भी हैं।

रिया (श्रद्धा कपूर) का जन्मदिन है और उसका बॉयफ्रेंड लव (ताहा शाह) चाहता है कि दोनों उस दिन शारीरिक संबंध बनाए। रिया तैयार है। इसके पहले कि लव और रिया अपने रिश्ते को नेक्स्ट लेवल तक ले जाए, रिया के सामने लव का राज खुल जाता है।

लव उससे प्यार नहीं करता बल्कि वह सिर्फ उसके साथ सोना चाहता है। साथ ही वह एक वेबसाइट बिलियनेयर बॉयज क्लब का सदस्य भी है जो उन सदस्यों को पाइंट्स देती है जो अपने प्यार और सेक्स के वीडियो को वेबसाइट पर डाउनलोड करते हैं।

लव का द एंड
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रिया और उसकी दो दोस्त जग्स और सोनिया, लव का द एंड करने की सोचते हैं और उसे सबक सिखाते हैं। दरअसल बदला लेने के लिए रिया और उसकी सहेलियाँ जो हरकतें करती हैं वो कही-कही जगह बचकानी लगती हैं।

ये बात ठीक है कि फिल्म का माहौल ऐसा बनाया गया है जो थोड़ा कॉमेडी का टच लिए हो, युवाओं को अच्छा लगे, लेकिन सब कुछ इतनी आसानी से हो जाता है कि कुछ देर बाद अखरने लगता है।

कुछ दृश्य ऐसे हैं जो मजेदार बन पड़े हैं। खासतौर पर लव के अंडरवियर में खुजली का पावडर डाल दिया गया है। वह अपनी दूसरी गर्लफ्रेंड के सामने बैठा है और बेसब्री से खुजाने को बेताब है। रिया और उसकी छोटी बहन के दृश्य भी अच्छे हैं। रिया की छोटी बहन अपनी 18 वर्षीय दीदी को कहती है कि उसकी (छोटी बहन की) जनरेशन की बातें वह नहीं समझ पाएगी।

क्लाइमेक्स में फिल्म कमजोर पड़ जाती है, जब रिया को लव एक कमरे में ले जाता है ताकि उसके साथ संबंध बना सके और बाहर पार्टी में उसके दोस्त टीवी स्क्रीन पर अंदर का माजरा देख रहे हैं।

संवाद और कलाकारों का अभिनय फिल्म की जान है। श्रद्धा कपूर ने अपने अभिनय की रेंज दिखाई है, लेकिन उनसे बाजी मार ले जाती है उनकी मोटी सहेली जग्स बनी पश्ती एस.। हीरो के रूप में ताहा शाह प्रभावित करते हैं।

Luv Ka The End
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निर्देशक ‍बम्पी ने फेसबुक जनरेशन को बेहतरीन तरीके से पेश किया है। उनकी बातें, ड्रेस सेंस, बेबाकी, स्क्रीन पर देखते समय अच्छी लगती है। यदि ‍स्क्रिप्ट का उन्हें पूरी तरह मिल जाता तो बात अलग होती।

राम संपत का संगीत तेज गति का है। टू नाइट, फन फंडा और मटन सांग देखते समय अच्छे लगते हैं। हालाँकि मटन सांग के लिए ठीक से सिचुएशन नहीं बनाई गई है।

‘लव का द एंड’ में ताजगी है तो है लेकिन सुगंध में कमी महसूस होती है।

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कुरियर से जाल में फंसा लादेन

By manojjaiswalpbt :अमेरिकी अधिकारियों को पता कैसे चला कि ओसामा बिन लादेन एबटाबाद में है. इसे लेकर कई दिलचस्प जानकारियां सामने आ रही हैं. रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका के हाथ लादेन का कुरियर लगा और यहीं से लादेन की उल्टी गिनती शुरू हुई.


रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि दो साल पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को लादेन तक चिट्ठियां पहुंचाने वाले अल कायदा के सदस्य की जानकारी मिली. इस शख्स को 'कुरियर' नाम से पुकारा जाता था. कुरियर अफगानिस्तान से चलता और फिर अचानक गायब हो जाता. कुछ महीनों पहले कुरियर अमेरिकी एजेंसियों को चकमा देने में नाकाम रहा. अमेरिकी जासूस बड़े गोपनीय ढंग से उसका पीछा करते हुए एबटाबाद तक पहुंच गए.

पता चला कि कुरियर एबटाबाद में शहर में घूमने फिरने के बाद हमेशा एक ही घर में जाता है. पाकिस्तान की सैन्य अकादमी से कुछ ही दूरी पर स्थित ये मकान शहर के सामान्य घरों से बेहद अलग था. 18 फुट ऊंची चारदीवारी वाला ये दो मंजिला मकान रहस्य की तरह था. आस पास के लोगों को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. यह भी पता नहीं था कि वहां कौन रहता है, रहने वाला क्या करता है.

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को यहीं से शक होना शुरू हुआ कि शायद इस मकान में अल कायदा का प्रमुख ओसामा बिन लादेन छुपा है. इसी बीच किसी दूसरे सूत्र से भी अमेरिकी जासूसों को यहां लादेन के छुपे होने की जानकारी मिली. ये जानकारियां सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तक पहुंचाई गईं. व्हाइट हाउस में पांच बैठकें हुई, तब जाकर ओबामा ने अधिकारियों को एबटाबाद में कार्रवाई करने के लिए हरी झंडी दी.

रविवार रात अमेरिकी सेना जब इस इमारत के करीब पहुंची तो लादेन के अरब अंगरक्षकों के फायरिंग शुरू कर दी. इमारत की छत से अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर पर फायरिंग की गई. यहीं से शक सच्चाई में तब्दील हुआ. अमेरिकी जवानों की इस फायरिंग का जबदस्त ढंग से जवाब दिया और 40 मिनट के भीतर ही लादेन का खेल खत्म कर दिया. रिपोर्टों के मुताबिक हमले में लादेन और उसके तीन बेटे मारे गए हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां

संपादन: मनोज जैसवाल
 
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मायावती को लगा अन्‍ना से डर

मनोज जैसवाल-लखनऊ. भ्रष्‍टाचार के खिलाफ देशव्‍यापी मुहिम चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे को उत्‍तर प्रदेश सरकार की ओर से तगड़ा झटका लगा है। अन्‍ना हजारे का एक मई को लखनऊ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के सदस्‍यों से मिलने का कार्यक्रम है। इसके लिए यूनिवर्सिटी का कांफ्रेंस हॉल बुक किया गया था लेकिन विश्‍वविद्यालय प्रशासन ने अब इसकी बुकिंग रद्द कर दी है।

एसोसिएशन के महासचिव डॉ. आर बी सिंह के मुताबिक अन्‍ना हजारे के साथ बैठक के लिए यूनिवर्सिटी का मालवीय कांफ्रेंस हॉल बुक किया गया था। उन्‍होंने मंगलवार को कहा, 'हम अन्‍ना हजारे और सिविल सोसायटी के अन्‍य सदस्‍यों से मिलने वाले थे लेकिन कुलपति ने आज हमें बताया कि हॉल की बुकिंग रद्द कर दी गई है।'


हालांकि विश्‍वविद्यालय प्रशासन ने अपनी सफाई में कहा है कि किसी 'अप्रिय घटना' से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। यूनिवर्सिटी के पीआरओ एस के द्विवेदी का कहना है, 'मालवीय हॉल में करीब 350 लोगों के बैठने की क्षमता है। लेकिन हमें लगता है कि इससे ज्‍यादा लोग जमा हो सकते हैं।'

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने हाल में जन लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली संयुक्त समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसमें कोई दलित नहीं है। उन्होंने मसौदा समिति के पुनर्गठन की मांग करते हुए कहा था कि इसमें किसी एक दलित को भी शामिल किया जाना चाहिए।

अन्‍ना से कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सहित कई नेताओं ने कहा था कि वह उत्‍तर प्रदेश की मायावती सरकार के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आंदोलन करें। अन्‍ना अपनी देशव्‍यापी यात्रा भी उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू करने वाले हैं।

गौरतलब है कि लोकपाल बिल पर जनता का समर्थन हासिल करने के मकसद से अन्‍ना हजारे ने पिछले दिनों भ्रष्‍टाचार के खिलाफ देशव्‍यापी अभियान की शुरुआत करने का ऐलान किया था। अन्‍ना इस अभियान की शुरुआत अप्रैल के आखिर में उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू करने वाले हैं। देश में जन लोकपाल बिल लाने की मांग को लेकर पिछले दिनों राजधानी दिल्‍ली में जंतर-मंतर पर

आमरण अनशन पर बैठे अन्‍ना हजारे ने ऐलान किया था कि वह देशभर में घूम-घूम कर भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम और इस बिल के प्रति लोगों को जागरुक करेंगे।
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दुनिया को एक और अफवाह से खतरा

मनोज जैसवाल ॥ नई दिल्ली
हमारी प्यारी दुनिया के जल्द खत्म हो जाने का एक और संदेश आया है। हम पहले भी ' प्रलय ', ' महाविनाश ' की भविष्यवाणियां सुनते आए हैं , पर एक भी सच नहीं साबित हुई। इस बार ' सर्वनाश ' की भविष्यवाणी की है अमेरिकी धर्मोपदेशक हैरॉल्ड कैंपिंग ने। उनके मुताबिक 21 मई , 2011 को जीसस क्राइस्ट धरती पर दोबारा लौटने वाले हैं और इसी के साथ दुनिया के खत्म होने की शुरुआत हो जाएगी। 89 वर्षीय कैंपिंग वही शख्स हैं , जिसने 6 दिसंबर , 1994 को भी सर्वनाश की भविष्यवाणी की थी। उधर , फैमिली रेडियो के संस्थापक हैरॉल्ड की भविष्यवाणी को वैज्ञानिकों , भूगर्भशास्त्रियों और धार्मिक मामलों के जानकारों ने खारिज कर दिया है। दुबई में मजहबी समुदाय ने उनकी कैंपेन को गैरजिम्मेदाराना करार दिया है। ऐंगलिकन पादरी रेवरेंड मिलर ने कहा , ' कई ऐसे संप्रदाय हैं , जो चर्च का हिस्सा नहीं हैं और लोगों की संवेदनशीलता का फायदा उठाते हैं। ' आइये जानते हैं किस आधार पर इस अमेरिकी ने ' दुनिया के सर्वनाश ' की बात कही है :

बाइबल को बनाया आधार : हैरॉल्ड कैंपिंग ने ' द इंडिपेंडेंट ' को दिए इंटरव्यू में कहा , ' मैंने पवित्र बाइबल के 70 साल तक गहन अध्ययन के बाद एक सिस्टम तैयार किया है। जिसमें मैथमेटिक्स का इस्तेमाल कर बाइबल में छुपी भविष्यवाणियों की खोज की जाती है। 21 मई को 1 अप्रैल एडी ( आफ्टर डेथ ) 33 से 722,500 दिन हो जाएंगे। 1 अप्रैल एडी 33 वही दिन है , जब ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। 722,500 का आंकड़ा बेहद अहम है , इसकी प्राप्ति 5, 10 और 17 जैसे अंकों को आपस में दो बार गुणा करने से होती है। ये सभी पवित्र अंक हैं। '

क्या होने वाला है : कैंपिंग का कहना है , ' अमेरिकी समय के मुताबिक शाम लगभग 6 बजे तबाही आएगी। दुनिया की दो फीसदी आबादी को तुरंत स्वर्ग भेज दिया जाएगा। बाकी आबादी को दूसरी जगहों पर भेज दिया जाएगा , जहां उन्हें 153 दिनों तक , यानी 21 अक्टूबर से ठीक पहले तक मौत और खौफ का सामना करना होगा। ' 6 दिसंबर , 1994 के गलत अनुमान पर वह कहते हैं , ' उस वक्त मैंने सावधानीपूर्वक रिसर्च नहीं की थी , लेकिन अब बड़े स्तर पर अध्ययन और ईश्वर द्वारा दिए गए कुछ सबूतों के आधार पर मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसा होने वाला है। '

संकेत क्या हैं : हैरॉल्ड का कहना है , ' जापान , न्यूजीलैंड और हैती में आए भूकंप आने वाली तबाही के सूचक हैं। एक अहम वजह है बदलते सामाजिक मूल्य। चोरी - धोखाधड़ी , झूठ बोलना , दुष्टता और सेक्सुअल विकृतियां। मसलन गे प्राइड मूवमेंट। यह भी अंत का संकेत है , जिसे प्रभु ने भेजा है। '

पहले भी हुए हैं दावे : बाइबल टाइम्स के फिल स्टोन्स ने 2010 में सर्वनाश का दावा किया था। उन्होंने न्यू टेस्टामेंट के एक गौस्पेल को आधार बनाते हुए कहा था , ' जीसस के धरती पर दोबारा आने की तारीख दो हजार साल बाद आने वाली है। क्राइस्ट 12 की उम्र में प्रार्थना स्थल गए थे , क्राइस्ट इयर के अनुसार वह 12 वां साल था। यह तारीख 2010 में आने वाली है। ' लेकिन यह दावा गलत साबित हुआ। 2010 में भविष्यवाणी की गई कि इसी साल 2 अप्रैल को दुनिया खत्म हो जाएगी। यहां भी बाइबल की गणना को आधार बनाया गया।
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कपटी चालों की शिकार न बन जाए मुहिम

मनोज जैसवाल-भ्रष्टाचार के खिलाफ उम्मीद के साथ शुरू हुई मुहिम अब सरकार द्वारा प्रायोजित 'शकुनि डिपार्टमेंट' की कपटी चालों की शिकार बनती नजर आ रही है। ऐसा नहीं है कि इसका अंदेशा नहीं था। मैंने खुद कई बार कहा है कि अलग-अलग किस्म और पार्टियों के नेता, कभी जन लोकपाल ड्राफ्ट का समर्थन नहीं करेंगे क्योंकि इसका सबसे ज्यादा प्रभाव उन्हीं पर पड़ना है। लेकिन इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे लोगों पर हर तरफ से हो रहे हमलों की तीव्रता अविश्वसनीय है।

जिस शर्मनाक तरीके से सत्तारूढ़ दल ने जॉइंट कमिटी में शामिल सिविल सोसायटी के सदस्यों को बदनाम करने की कोशिश की है, वह किसी भी सभ्य व्यक्ति के लिए करारा झटका हो सकता है। ईमानदारी से कहूं, तो मुझे इस बात पर आश्चर्य हुआ था कि सरकार ने अन्ना हजारे की संयुक्त समिति बनाने की मांग इतनी आसानी से मान ली थी। सरकार की यह चाल किसी से छुप नहीं सकती।

सरकार के पास इस मुहिम को शुरुआत में ही दबा देने के कई कारण हैं। लगातार मीडिया का फोकस बने रहने के कारण अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के ऐसे प्रतीक बनते जा रहे थे जिन्हें टीवी देखने वाला वर्ग हाथों-हाथ ले रहा था। सरकार के लिए उनके खरे-खरे बयान और स्पष्ट बातों को संभालना मुश्किल हो रहा था। सत्ता पक्ष के धूर्त वकीलों-नेताओं ने तभी सोच लिया होगा कि इस चिंगारी को आग में बदलने से कैसे रोकना है।

अन्ना के अनशन के दौरान मीडिया में सुलह करने और हल निकालने के बयानों की तर्ज पर सभ्य लोगों की तरह मसले पर चर्चा करने के बजाय, वे हर दिशा से कमिटी के कुछ सदस्यों का चरित्रहनन करने में जुट गए। जैसे कि कुछ दिनों पहले अन्ना ने सोनिया गांधी को अपनी चिट्ठी में लिखा था कि इन आधारहीन और मनगढ़ंत आरापों के पीछे सत्ता पक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं का हाथ है और ऐसा मालूम होता है कि यह काम करने के लिए उन्हें पार्टी का समर्थन मिला हुआ है। एक दब्बू मीडिया हाउस को गलत खबरें लीक करने से लेकर हर वह कपटी चाल अपनाई गई जो कई कॉर्पोरेट हाउस अपनाते हैं। 'शकुनि डिपार्टमेंट' ने तो भारतीय राजनीति की 'सारी अच्छाइयों' के संत समान प्रतीक अमर सिंह को भी इस काम में लगा दिया।

विस्तार में जाए बगैर यह बात ध्यान देने वाली है कि शांति भूषण टेप में भी अमर सिंह अवतरित होते हैं और उस जज का जिक्र आता है जो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच की सुनवाई कर रहे हैं। सत्ता पक्ष जो अनगिनत घोटालों के चलते बैकफुट पर है, उसके लिए यह एक तीर से दो शिकार वाली बात है। एक तो इस घोटाले की वजह से उनकी हालत खराब है और दूसरा, अमर सिंह के बेहद करीबी कॉर्पोरेट भी इसमें शामिल हैं।

'कपटी चाल विभाग' ने एक ही वार में सिविल सोसायटी के लोगों को अविश्वसनीय साबित करने की कोशिश की ताकि आम जनता निराश होकर अपने हाथ खड़े कर दे और यह कहे - ये सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के प्रतीक बन चुके चेहरों के खिलाफ अमर सिंह को खड़ा कर दिया, जिनका खुद का राजनीतिक भविष्य अधर में है और वह किसी राजनीतिक खेमे के साथ नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह कि इसने असल मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका कर आरोप-प्रत्यारोप के दौर में उलझा दिया है। और यकीन मानिए, यदि शांति भूषण और प्रशांत भूषण को कमिटी से हटाया जाता है तो उनकी जगह लेने वालों के खिलाफ भी इसी तरह से बदनाम करने का अभियान छेड़ा जाएगा।

सोनिया को लिखी चिट्ठी में अन्ना ने अपनी खास साफगोई वाली शैली में यह कहा है कि इस तरह का चरित्र हनन भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के लिए अच्छ नहीं है और जो नेता व राजनीतिक लोग इसमें लिप्त हैं, इसमें उनके नंगे होने का डर कहीं ज्यादा है। तमाम बु्द्धिजीवी टाइप लोग कह रहे हैं कि अन्ना हमेशा रोने वाले बच्चे की तरह शिकायती लहजा अपना रहे हैं। यह अलग बात है कि यह चेतावनी देते वक्त अन्ना यह भूल गए कि सिविल सोसायटी के लोगों से उलट उनका पाला मोटी चमड़ी वाले भ्रष्ट नेताओं से पड़ा है।

'कपटी चाल डिपार्टमेंट' ने एक और मोर्चा खोला - तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग। बेशक इस बात पर बहस हो सकती है कि भ्रष्टाचार विरोध विधेयक में क्या-क्या बातें रखी जाएं और सिविल सोसायटी की तरफ से कौन इस कमिटी का सदस्य बने या फिर उनके चुने जाने का पैमान क्या हो - लेकिन इस मामले में जिस तरह से हमारे 'शिक्षित' वर्ग ने जो प्रतिक्रिया दी, उससे उबकाई आती है। जब बातचीत में सभ्यता दिखाने की जरूरत थी तब इन पढ़े-लिखे लोगों ने इस आंदोलन को ब्लैकमेल का नाम दे दिया। यह तो वही बात हुई कि सूप बोले तो बोले, चलनी क्या बोले, जिसमें बहत्तर छेद।

जिस तरह से ये लोग (बुद्धिजीवी) दूसरों की राय को कूड़ा बताते हैं, वह हैरत में डालने वाला है। इन्हें लगता है कि जो लोग इनके विचार से सहमत नहीं हैं, वे बेवकूफ हैं। ये लोग अपने दुष्प्रचार में इतने प्रभावी हैं कि मैंने कई लोगों को अपनी राय बदलते देखा है सिर्फ इसलिए कि वे इस 'महान कैंप' का हिस्सा दिखें।

खैर, जैसा कि मैंने कहा, यह सब वैसे ही हो रहा है जैसा अंदेशा था और मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में आरोप- प्रत्यारोप और गंभीर और तीखे होने वाले हैं। मैंने देखा है कि यह दुष्प्रचार अभियान किस तरह से उन लोगों पर बुरा असर डाल रहा है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून बनाना चाहते हैं। पिछले एक हफ्ते में ड्राफ्ट पर काम करने की बजाय उन्होंने इन मनगढ़ंत आरोपों का जवाब देने में ज्यादा समय खर्च किया है। सरकार का शकुनि डिपार्टमेंट यही तो चाहता है- उन्हें इतना थका दिया जाए कि वे समझौता करने को मजबूर हो जाएं और जनता में भी इस मुद्दे पर शोर कम हो जाए। अब जिम्मेदारी हम लोगों पर, सच का साथ देने वालों पर है कि हम अपना ध्यान न बंटने दें। इस मुद्दे पर हमारी मांग थमनी नहीं चाहिए और न ही हमारा समर्थन कम होना चाहिए ताकि भ्रष्ट खुद ही थक-हार जाएं।
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जब लगी हो बुरी नजर, यह उपाय करें

मनोज जैसवाल -हम अक्सर यह सुनते हैं कि बच्चे को बुरी नजर लग गई या नजर लगने से दुकान बंद हो गई। नजर किसी भी सुंदर या अच्छी चीज को लग सकती है जैसे- सुंदर बच्चे को, दुकान को, घर को आदि। ऐसे में बुरी नजर से मुक्ति पाने के लिए टोने- टोटके ही अपनाएं जाते हैं। अगर आपके घर के किसी सदस्य या आप पर बुरी नजर का प्रभाव है तो नीचे लिखे टोटके अपनाकर बुरी नजर से मुक्ति पा सकते हैं।

उपाय

- नारियल को काले कपड़े में बांधकर सिलकर घर से बाहर लटका दें तो घर पर बुरी नजर का प्रभाव नहीं पड़ता।

- थोड़ी सी साबुत फिटकरी लेकर नजर लगी दुकान पर से 31 बार उसारें। फिर किसी चौराहे पर जाकर उसे उत्तर दिशा में फेंककर पीछे देखें बिना लौट जाएं। दुकान पर लगी नजर दूर हो जाएगी।

- थोड़ी सी राई, नमक, आटा और सात सूखी लाल मिर्च लेकर नजर दोष से पीडि़त व्यक्ति के सिर पर से सात-बार घुमाकर आग में डाल दें। नजरदोष होने से मिर्च जलने पर गन्ध नहीं आएगी।

- घर के निकट वृक्ष की जड़ में शाम को थोड़ा सा कच्चा दूध डाल दें। फिर गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। नजरदोष दूर हो जाएगा।

- मंगलवार को हनुमान मन्दिर जाकर हनुमान जी के कन्धे का सिंदूर लाकर लगाने से बुरी नजर का प्रभाव दूर हो जाता है।

- पुराने कपड़े की सात चिंदियां लेकर सिर पर से 21 बार उसारकर आग में जलाने से बच्चे को लगी नजर समाप्त हो जाती है।

- पीली कौड़ी में छेद करके बच्चे को पहनाने से उसे नजर नहीं लगती।

- नए मकान की चौखट पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधने से उस पर बुरी नजर नहीं लगती है।
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