आने वाला कल हमारा होगा


मनोज जैसवाल 
य ह दशक शिक्षा के क्षेत्र में भारत का होगा। भारत की शिक्षा में बढ़ती पकड़ का ही नतीजा है कि अमरीकन राष्ट्रपति एक नहीं कई बार भारतीय छात्रों की उन्नति से अमरीकंस को ताकीद कर चुके हैं। भारतीय युवाओं ने सरहद पार कर न केवल ज्ञान प्राप्त किया है बल्कि विदेशों में उच्च शिक्षा के दम पर ऊंचे ओहदे की नौकरी भी हासिल कर रहे हैं। 

देश में बढ़ते आईआईटीयंस, आईआईएम, इंजीनियर्स को देखकर लगता है कि 21 वीं सदी का दूसरा दशक का ध्यान उच शिक्षा पर ही होगा। आजादी के शुरूआती पचास सालों में देश में शैक्षिक स्तर काफी बढ़ा है और निरंतर बढ़ रहा है, लेकिन देश के हर शख्स को केवल शिक्षित करना बल्कि उसे रोजगारोन्मुखी शिक्षा देना बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेकिन पिछले सालों में हुई प्रगति को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा का बेहतरीन होगा। आने वाले दिनों में देश में तकनीकी और प्रबंधन की शिक्षा के प्रतीक चिन्ह बनकर उभरे आईआईटी और आईआईएम पहले ही कई नए शहरों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटीज को वल्र्ड क्लास बनाने पर भी काम शुरू है। 

2020 तक स्कूली पढ़ाई में तकनीकी का दखल बढ़ चुका होगा लेकिन ऑनलाइन एजूकेशन नया फिनामेना बन चुका होगा। ऎसे स्कूल खुल चुके होंगे जो पूरी तरह से ऑनलाइन एजुकेशन दे रहे होंगे। डिग्री स्तर पर पढ़ाई और परीक्षा दोनों ऑनलाइन हो चुकी होगी। 

आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में ऑनलाइन एंट्रेस एग्जाम की शुरूआत तो हो ही चुकी है। हालांकि शिक्षा का अधिकार अभी भूमिगत समस्याओं से उलझ रहा है लेकिन 2020 तक यह अनुमान लगाया जा सकता है कि शिक्षा के अधिकार के कारण शिक्षा का प्रसार निश्चित रूप से सभी दिशाओं में (गंाव और शहर दोनोे में) तेजी से बढ़ेगा। प्रारंभिक शिक्षा पंचायतीराज संस्थाओं को सौंपी जा रही हैं। पंचायती राज की संस्थाएं चाहे शिक्षा का स्तर उतना अधिक न सुधार सकें पर शिक्षा के प्रसार के आंकड़ों में जरूर क्रांतिकारी प्रभाव पडेगा। स्कूलों मिड डे मिल और परीक्षाओं में ग्रेडिंग व्यवस्था के मूल्यांकन से स्कूल स्तर पर मौलिक परिवर्तन आएंगे। जो शिक्षा अब तक मैकाले की एलीट शिक्षा व्यवस्था थी अब मास एजूकेशन बनकर जनसामान्य तक पहुंच पाएगी। 

अगले दशक में जहां एक ओर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों की बाढ़ आने की संभावना है। चूंकि अकेले सरकार के पास इतने संसाधन नहीं है, लिहाजा निजी क्षेत्र आगे आ रहा हैं। कुछ संस्थान स्वयं सरकार, कुछ संस्थान पी.पी. पी. के आधार पर तथा कुछ अकेले निजी क्षेत्र के द्वारा तथा कुछ संस्थान विदेशी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा शुरू किए जा रहे हैंै। आने वाले समय में इनमें कुछ विश्व स्तरीय मानदंडों के संस्थान होगें, कुछ केंद्रीय और कुछ स्थानीय। इस प्रकार एक नई विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्कृति सामने आएगी। इस नई शैक्षिक संस्कृति में एक ग्लोबल कॉम्पीटीशन का माहौल देश में पैदा होगा। ग्लोबलाइजेशन के बाद सरहदें समाप्त हो गई हैं। हमारे उच्च शिक्षाधारी ग्लोबल कॉम्पीटीशन में अपने आपको आगे रख सकें इसके लिए उच्चस्तरीय मानकों के उच्च शिक्षण संस्थान खोलने होगें। साथ ही उन्हे लगातार उच्च स्तरीय मानकों को बढ़ाना होगा, जिससे वे वैश्विक उच्च संस्थानों के साथ प्रतियोगिता में खरे उतर सकें। ग्लोबल तौर पर देखें तो शिक्षा व्यवस्था में डिजीटलाइजेशन करना अवश्यंभावी होगा। शिक्षा के यांçन्त्रक आधार बनने से सूचना का प्रवाह अनंत बनेगा और सूचना को ज्ञान के रूप में परिवर्तित करने में कई प्रकार की कठिनाइयां भी चुनौतियां बनकर आएंगी। आने वाले दशक में कक्षाएं स्मार्ट क्लास रूम बन जाएंगी, जहां सभी प्रकार की आधुनिक तकनीकें उपलब्ध होंगी manojjaiswalpbt@gmail.com
 
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